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साधु ने सरिस्का के जंगल में 4 किमी क्षेत्र में लगा दिए 700 पौधे

3 वर्ष पहले
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सरिस्का की सदर रेंज के टोडी नीजरान की ढाणी के पास उदयनाथ आश्रम के साधु ने जंगल में 4 किलोमीटर क्षेत्र में 700 पौधे लगाए हैं। पक्षियों के आशियाने और वन्यजीवों को छाया उपलब्ध कराने के लिए लगाए इन पेड़ों की अब वे 8 महीने से सेवा कर रहे हैं। इसके लिए 3 मजदूर भी लगाए हैं। आश्रम की धार्मिक आस्था से जुड़े इन पेड़ों को ग्रामीणों ने भी नुकसान नहीं पहुंचाया है। पानी की कमी से सूख रहे जंगल में साधु के लगाए पेड़ फल-फूल रहे हैं, क्योंकि आश्रम के साधु फूलनाथ महाराज पेड़ों की सिंचाई के लिए ट्रैक्टर-टैंकर भी खरीद लाए हैं। इससे पहले आश्रम के आसपास लगाए पौधे बड़े हो गए हैं। इनमें करीब 40 पेड़ बरगद के हैं। उन पर बैठे मोर, कबूतर, तोता सहित सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों का कलरव सुनाई देता है। साधु की आेर से लगाए पेड़ों में बरगद, शीशम, गूलर और नीम के हैं, लेकिन 90 फीसदी पेड़ बरगद के हैं। यह आश्रम थानागाजी से करीब आठ-नौ किलोमीटर दूर जंगल में है। सरिस्का की चौकी उदयनाथ के पास स्थित आश्रम के साधु फूलनाथ महाराज बताते हैं कि पर्यावरण की सुरक्षा और पक्षियों के आशियाने के लिए अलवर से करीब 60 हजार रुपए के 700 पौधे मंगवाकर लगाए गए। नाथ संप्रदाय की आश्रम की गद्दी से जुड़ी आस्था के कारण ग्रामीणों ने भी पेड़ों को सुरक्षित रखा है।

अलवर. उदयनाथ आश्रम के आसपास बड़े हुए बरगद के पेड़।

पर्यावरण व वन्यजीवों के लिए हर महीने कर रहे 20 हजार रुपए खर्च

चार किलोमीटर क्षेत्र में लगाए गए इन पेड़ों की सिंचाई और रखरखाव पर हर महीने 20 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। इसमें 3 मजदूरों को हर महीने 5-5 हजार रुपए मजदूरी और ट्रैक्टर के डीजल पर खर्च हो रहे हैं। पहाड़ से प्राकृतिक जलधारा से आश्रम के कुंड में आ रहे पानी से टैंकर को भरकर इन पेड़ों की सिंचाई हो रही है। फूलनाथ महाराज कहते हैं कि हरियाली धरती का श्रृंगार है। इसी उद्देश्य को लेकर पेड़ लगाकर उनका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इस वक्त सभी पेड़ बढ़ रहे हैं, वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए लगाए ड्रमों को हटाकर अब हवा के लिए उनमें ट्री गार्ड लगाए जाएंगे। पेड़ों पर खर्च वे आश्रम में भक्तों के चढ़ावे से ही कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि उनके गुरु किशनलाल महाराज के लगाए सैकड़ों पेड़ करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए छाया कर रहे हैं।

फूलनाथ महाराज

हर महीने बीस हजार रुपए का खर्चा, 90 फीसदी पेड़ बरगद के लगाए, सिंचाई के लिए खरीद लाए ट्रैक्टर-टैंकर

पक्षियों के लिए रोजाना 150 किलो चुग्गा

आश्रम के पास ही बनाए चबूतरे पर बाबा फूलनाथ महाराज रोजाना पक्षियों के लिए डेढ़ सौ किलो चुग्गा डालते हैं। यहां 100 किलो बाजरे का चुग्गा सुबह और 50 किलो शाम को डाला जाता है। महाराज बताते हैं कि नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी में डेढ़ सौ किलो चुग्गा डालते हैं। जब खेतों में फसल कटने लगती है तो पक्षियों का पलायन हो जाता है। ऐसी स्थिति में 8 महीने सौ किलो चुग्गा ही डाला जाता है। यह चुग्गा आश्रम से जुड़े आसपास के 20 गांवों के भक्त ही फसल पर बोरियों में भरकर यहां चढ़ावे में डाल जाते हैं। आश्रम में करीब 2000 किलो चुग्गे का स्टॉक रहता है।

आश्रम के साधु पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। ये पेड़ पक्षियों और वन्यजीवों को आशियाना बनेंगे। इससे दूसरे लोग भी पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। वे अपने खर्चे पर ही इन पेड़ों का रखरखाव और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं। -डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज, मुख्य वन संरक्षक, सरिस्का बाघ परियोजना, अलवर

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