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समय व समाज के जटिल यथार्थ को बेबाकी से व्यक्त करती है गजल : असगर

3 वर्ष पहले
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अलवर. गजल संग्रह का विमोचन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि।

विनय मिश्र के गजल संग्रह तेरा होना तलाशूं का किया विमोचन

भास्कर संवाददाता | अलवर

नया आयाम व सरगम संस्था की ओर से होटल इंद्रलोक क्लासिक में आयोजित समारोह में डॉ. विनय मिश्र के गजल संग्रह तेरा होना तलाशूं का विमोचन किया गया। समारोह में प्रसिद्ध कथाकार, नाटक लेखक एवं समीक्षक असगर वजाहत ने कहा कि गजल समय और समाज के जटिल यथार्थ को बेबाकी से व्यक्त करती है। नए गजल संग्रह में विनय मिश्र ने विचार व संवेदनाओं की पैनी धार दी है। उन्होंने कलात्मक अभिव्यक्ति से हिंदी कविता को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में ऐसे गजलकार व कवि हैं जो अपनी संवेदना व लेखनी से लोगों के दिल को छू लेते हैं। समाज की जटिलताएं ही मन में विभिन्न भाव उत्पन्न करती हैं। साहित्यकार इन भावों को कलात्मक तरीके से पेश करता है।

समारोह में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. शंभूनाथ तिवारी ने कहा कि मिश्र आम आदमी की समस्याओं उनकी चिंता तथा पीड़ा को समझते है इसी कारण उनकी गजल में वे सब होता है। सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था के विरोध का स्वर भी उनकी गजल में साफ झलकता है। दिल्ली से आए युवा आलोचक डा. दिनेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी गजल की जो स्थिति है उसमें गजल की रचना ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उसे हिंदी कविता की मुख्य धारा में स्थापित करने के लिए सचेत, सांगठनिक प्रयास करने की भी जरूरत है। कार्यक्रम में बनारस की कथाकार ज्योत्स्ना प्रवाह ने कहा कि मिश्र की गजलों में बनारस का मिजाज बोलता है, इस निराशावादी समय में उनके यहां आशाओं के दीप जलाने की बात बार बार आती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली से आए साहित्यकार राम कुमार कृषक ने हिंदी गजल की यात्रा के बारे में बताया। कार्यक्रम में मिश्र ने अपनी गजलों को पाठ किया। समीक्षक डॉ जीवन सिंह मानवी ने गजल संग्रह पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. सीमा विजयवर्गीय ने किया। कला कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश चंद खंडूरी ने आभार जताया।

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