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प्रॉडक्शन उद्योग पिछड़े तो घटेंगी नौकरियां

3 वर्ष पहले
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राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनपी कौशिक ने कहा कि देश में यदि प्रॉडक्शन सेक्टर में ग्रोथ नहीं हुई तो हालात चिंताजनक हो जाएंगी। यहां एलआईईटी में कंप्यूटर साइंस विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि संबोधन के बाद भास्कर से बातचीत में उन्होंने यह बात कही। इंजीनियरिंग क्षेत्र की नौकरियों में आई गिरावट के सवाल पर वीसी बोले कि इंजीनियर की जरूरत वहां है, जहां उत्पादन हो रहा है, देश में लंबे समय से उत्पादन क्षेत्र में गिरावट है, ऐसे में यदि प्रॉडक्शन सेक्टर को बढ़ावा नहीं दिया गया तो स्थितियां इससे भी ज्यादा खराब होंगी। उनका कहना था कि प्रोफेशनल कोर्सेज में गिरावट देश के लगभग सभी राज्यों में है। इसका दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि प्रदेश में युवा घर छोड़ना नहीं चाहते हैं। उनकी चाहत है कि यहीं नौकरी मिल जाए। युवाओं को यह जिद छोड़नी होगी और घर छोड़कर दूसरे राज्य में नौकरी के लिए तैयार रहना ही होगा। बीकानेर तकनीकी यूनिवर्सिटी के गठन पर उन्होंने कहा कि हमें हमारी क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। हमने यूनिवर्सिटी को सिस्टम में ढाल दिया है। तमाम परीक्षाएं और रिजल्ट समय पर जारी हो रहे हैं। हालांकि नई यूनिवर्सिटी से कुछ परेशानियां हो सकती हैं, लेकिन उनका भी निराकरण हो जाएगा। गौरतलब है कि फिलहाल राजस्थान तकनीकी यूनिवर्सिटी के पास 18 से 20 हजार विद्यार्थी ही नामांकित हैं। फिलहाल अधिकार क्षेत्रों का विभाजन नहीं हुआ है, लेकिन विभाजन होने के बाद आरटीयू में नाममात्र के विद्यार्थी ही रह जाएंगेे। यही नहीं अलवर का अधिकार क्षेत्र भी बीकानेर होने की पूरी संभावना है। देश में इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट क्षेत्र में तेजी से आई गिरावट पर कुलपति ने कहा कि इसका बड़ा कारण सीटों की संख्या में बढ़ोतरी होना रहा। पिछले दो साल में कॉलेज नहीं खोले गए हैं, इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है और आगे भी मिलेगा। फिलहाल हमारा पूरा जोर कॉलेजों को इंडस्ट्री से जोड़ने का है। इसी सिलसिले में जयपुर में 2 मई को प्रदेश के कॉलेजों के निदेशक, प्रिंसिपल व चेयरमैन के साथ बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं।

भास्कर खास
एनपी कौशिक

आरटीयू कुलपति ने इंजीनियर्स की घटती नौकरियों पर जताई आशंका
अभी लीडर नहीं लेबर हैं हम
कुलपति ने साफ शब्दों में कहा कि हमारा प्रयास टेक्नोनेशलिज्म पर है। आजादी के बाद भी आज कई बड़े क्षेत्रों में तकनीकी हमारी नहीं है। हम लीडर बनकर नहीं सिर्फ लेबर बनकर काम कर रहे हैं। इस रवैये को बदले जाने की जरूरत है ताकि नए रोजगारों का सृजन हो सके।

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