देश में एकता के लिए चिंतन जरूरी
अलवर | देश के प्रसिद्ध कथाकार, नाटककार और समीक्षक असगर वजाहत ने कहा कि देश की विविधता में एकता के लिए महान उदारता, सहिष्णुता और आदर्श बनाए रखना जरूरी है। भारत एक महादेश है, यहां विविधता में एकता रही है, लेकिन धर्म और जाति के नाम पर दंगे, वैमनस्य और कटुता दुर्भाग्यपूर्ण है। कवि विनय मिश्र के गजल संग्रह तेरा होना तलाशूं का लोकार्पण करने आए कथाकार वजाहत ने शनिवार को एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जहां इतनी बड़ी विविधता है, वहां चिंता होना जरूरी है, लेकिन एकता बनाए रखने के लिए क्या करें, इस पर चिंतन भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कला, साहित्य और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण हो गया है, जिससे उन्हें संवेदनशील बनाया जा सके। आज हमारे समाज के सामने बड़ी चुनौती है कि लोगों को संवेदनशील बनाकर एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को बढ़ाया जाए। देश की हजारों साल पुरानी भाईचारे की परंपरा को कला, साहित्य, संस्कृति और संगीत के माध्यम से मजबूत किया जाए। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध नाटक जिन लाहौर नी वेख्या के लेखक वजाहत से बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल : इतिहास में नए तरीकों से बदलाव के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं?
वजाहत : इतिहास वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर लिखा जाता है। इसे प्रामाणिकता के साथ स्थापित करना होता है। कल्पना के आधार पर इसका पुनर्लेखन इतिहास के साथ अन्याय है। ये देश और युवा पीढ़ी के लिए बेहद घातक है।
सवाल : साहित्य के साथ रंगकर्म में गिरावट आ रही है, क्यों?
वजाहत : हिंदी भाषा के रंगकर्म में गिरावट आई है। 50 करोड़ के हिंदी भाषाई लोगों के अनुपात में नाटक नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन अब फिर से नाटकों की संख्या बढ़ रही है और लोग इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। साहित्य लगातार वृद्धि कर रहा है।
सवाल : साहित्य में विभिन्न विचारधाराओं के लोग रहे हैं, लेकिन अब वे राजनीतिक दलों में बंट रहे हैं, क्यों?
वजाहत : साहित्य में अलग-अलग विचारों के लोग पहले से रहे हैं, लेकिन संसार का हर साहित्यकार मानवता का संदेश देता मिलेगा। साहित्य का मुख्य उद्देश्य जनहित है। यह लोगों को संवेदनशील, सहिष्णु बनाकर एकता का संदेश देता है, लेकिन साहित्य को राजनीति से जोड़ने वाले लोग इसका अहित कर रहे हैं।
सवाल : डिजिटलाइजेशन से युवा पीढ़ी का पुस्तकें पढ़ना खत्म सा हो गया है, क्यों?
वजाहत : डिजिटलाइजेशन से साहित्य बढ़ रहा है। पहले लोग प्रिंट पढ़ते थे, लेकिन अब हिंदी साहित्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वंचित लोगों तक भी पहुंच रहा है। फेसबुक पर एक पोस्ट को एक साथ 50 हजार लोग पढ़ रहे हैं। प्राचीन काल के ताम्रपत्र को कागज और कलम में और अब उसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में रिप्लेस किया गया है। ये नए माध्यम साहित्य को बढ़ा रहे हैं।
असगर वजाहत