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बायो मेडिकल वेस्ट की ऑनलाइन मॉनीटरिंग, विशेष बार कोड लगे कंटेनरों में होगा ट्रांसपोर्ट

3 वर्ष पहले
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भास्कर टीम| पानीपत व प्रदेश के विभिन्न जिलों से

हरियाणा के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों की ओर से बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में की जा रही गड़बड़ी रोकने के लिए बायो मेडिकल वेस्ट थैलियों की बार कोडिंग होगी। इससे प्रत्येक अस्पताल में से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट की ऑनलाइन मॉनीटरिंग होगी। किस अस्पताल से कितना बायो वेस्ट निकला और कितना निकलना चाहिए था, इसका पूरा आकलन होगा। बायो वेस्ट को फेंकते मिले तो पकड़े जाने पर बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और हैंडलिंग एक्ट 1998 संशोधित नियम 2016 में पांच साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल बायो वेस्ट निस्तारण एक्ट 1998 में संशोधन कर नया कानून बनाया है। इसके तहत अब प्रत्येक अस्पताल और पैथोलॉजी लैब को प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अपने संस्थान का पंजीयन करवाना ही होगा।

ग्राउंड रिपोर्ट: बड़े अस्पतालों ने शुरू की व्यवस्था, छोटों के पास संसाधनों की कमी

अम्बाला सिटी:

आईएमए स्टेट पैट्रन डाॅ. डीएस जसपाल ने बताया कि यह नोटिफिकेशन अप्रैल 2019 से लागू हुआ है। जिला के सिविल अस्पताल और निजी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट को लेकर साल भर का ठेका होता है। वेस्ट प्रोवाइडर बायोमेडिकल वेस्ट अस्पताल से लेकर जाते हैं। जिला में सीटीएफ प्लांट नहीं है।

सिरसा:

इन विजन मैनेजमेंट सीटीएफ, फूलकां के डायरेक्टर विकास कुमार के अनुसार जिन अस्पतालों ने ऑफलाइन आवेदन किया है, वे ऑनलाइन आवेदन करें। जो नए अस्पताल खुल रहे हैं या खुलेंगे उनको भी ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी होगा।

ऐसे होगी ऑनलाइन मॉनीटरिंग, मिलेगी पूरी जानकारी

फतेहाबाद:

इस बारे में फतेहाबाद के सीएमओ डॉ. मुनीष बंसल ने कहा कि इस बारे में विभाग की प्लानिंग तो चल रही थी, लेकिन हमारे पास अभी तक पूरी जानकारी नहीं पहुंची है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर इस पर काेई चर्चा नहीं हुई है। फतेहाबाद जिले में कहीं भी सीटीएफ प्लांट नहीं है।

रेवाड़ी:

यहां कई अस्पतालों में यह लागू हो चूका है। शहर के नागरिक व निजीअस्पताल का बायोमेडिकल वेस्ट गुड़गांव की एक कंपनी उठाती है। प्रत्येक दिन कंपनी की गाड़ी यहां से मेडिकल वेस्ट लेकर जाती है। यहां भी कोई प्लांट नहीं है।

4 तरह से होगा बायो वेस्ट का रखाव

पीली थैली

शीशी में पैक खराब दवाएं, खराब कटे हुए अंग, भ्रूण, खून की थैलियां, मानवीय ऊतक, को रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट और सरकार की सख्ती

मकसद है प्रदूषण रोकना

सफेद प्लास्टिक पारदर्शी कंटेनर

अंग काटने व सिलने के उपकरण, सूइयां, सीरिंज, स्काल्पेस ब्लेड, ब्लेड आदि।



इसके लिए प्लांटों के वाहनों में जीपीएस लगे हैं। इससे उनके बारे में सभी जानकारी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पास जाएगी। बार कोडिंग से बोर्ड मुख्यालय के सॉफ्टवेयर में उसे भी अपडेट किया जा रहा है।

लाल थैली

बोतलें, सीरिंज, दस्ताने, टयूबिंग्स, कैथेटर, मूत्र की थैलियां, इंट्रावीनस ट्यूब आदि रखेंगे।

हिसार:

बड़े अस्पतालों में शुरू हो चुका है। अभी छोटे क्लीनिक और लैब तक पहुंच नहीं है। इनके संचालक अभी तक बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के प्रति गंभीर नहीं है। इसलिए अन्य कचरे में मेडिकल वेस्ट मिक्स कर फेंक देते हैं। सिनर्जी कंपनी के मैनेजर राकेश पांडेय का कहना है कि ऑनलाइन मॉनिटरिंग से बायो मेडिकल वेस्ट का सही एवं नियमानुसार निस्तारण संभव होगा। प्लांट में मेडिकल वेस्ट की छंटनी होती है, अधिकांश कचरे को भट्टी में जला दिया जाता है। प्लास्टिक को मशीन में डाल काटकर री-साइकल किया जाता है।

नीला कार्ड बोर्ड बॉक्स

टूटा हुआ और दूषित कांच, धातु के औजार, दवा की कांच की खराब हुई एंप्यूलस आदि।

11 टन मेडिकल बायो वेस्ट प्रदेश में रोजाना निकल रहा है

अब हर अस्पताल संस्थान को रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जहां मेडिकल बायो वेस्ट है। पहले आयुष अस्पताल इसके दायरे में नहीं आते थे, लेकिन अब इन्हें भी रजिस्ट्रेशन करना होगा। अब नर्सिंग होम के अलावा क्लीनिक, लैब के सैंपल कलेक्शन सेंटर, डिस्पेंसरी, पैथोलॉजी लैब, ब्लड बैंक समेत सभी मेडिकल बायो वेस्ट वाले संस्थान।

बोर्ड मुख्यालय को यह जानकारी मिलती रहेगी कि किस अस्पताल से कितना बायो वेस्ट कब व किस गाड़ी में उठाया। प्लांट में कितना बायाे वेस्ट पहुंचा। ऐसे में बोर्ड की हर अस्पताल पर नजर रहेगी।

बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण किया जाना मानव के लिए सही है। बायो वेस्ट उठाने वालों को गंभीर संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का खतरा है। साथ ही पर्यावरण को भी बहुत नुकसान हो रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार इस मामले में गंभीर हैं।

भिवानी:

सिविल व निजी अस्पतालों के बायो बेस्ट काे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिकृत कंपनी प्रतिदिन प्लांट में वेस्ट ले जाते हैं। आईएमए प्रधान डॉ. एमएल शर्मा ने बताया कि निर्धारित मापदंड के अनुसार पीला, लाल, नीला, सफेद और काला बैग कचरे को इकट्‌ठा करने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं।

पानीपत:

सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने बताया कि सिविल अस्पताल का दो साल पहले से रजिस्ट्रेशन हो रखा है। बायो मेडिकल वेस्ट को उठाने के लिए एजेंसी की वैन रोजाना मेडिकल वेस्ट को ले जाती है। इस मामले निजी अस्पतालों से आगे है।

11 टन बायो वेस्ट निकल रहा है प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों से।

11 सीटीएफ हैं इसके हरियाणा में, सबसे ज्यादा 3 सिरसा में हंै।

बायो मेडिकल वेस्ट के लिए बना नया एक्ट, इधर-उधर किया तो 5 साल जेल और जुर्माने का प्रावधान

निजी और सरकारी अस्पतालों ने अपने स्तर पर किया लागू, तकनीकी सुविधाओं की है खामी

अब तक एसटीएफ प्लांट मालिक अपने स्तर पर बायो वेस्ट उठाने का रेट तय करते थे, अब इसके लिए स्टेट लेवल एडवाइजरी कमेटी गठित की जाएगी। जो रेट तय करेगी। रेट का मुद्दा अस्पताल संचालकों ने सरकार के सामने भी रखा था। इस कमेटी का चेयरमैन स्वास्थ्य विभाग के सचिव हैं।

150 किलोमीटर था एसटीएफ प्लांट का दायरा, अब इसे घटाकर 75 कर दिया गया है।

सोनीपत:

सामान्य अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी का बायो वेस्ट भी एक निजी कंपनी उठा रही है। सिविल सर्जन जसवंत पूनिया ने बताया कि टेंडर उसी कंपनी को दिया जाता है, जिसे पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड प्रमाणित करता है। आईएमए के पूर्व प्रधान डा. दिव्या ने बताया कि अब सभी ऑनलाइन रिपोर्ट भेज रहे हैं।

जींद:

प्राइवेट कंपनी को बायो मेडिकल वेस्ट उठाने का टेंडर दिया गया है। सिविल सर्जन डा. संजय दहिया का कहना है कि शहर के सभी प्राइवेट अस्पताल ने स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से रजिस्ट्रेशन करा लिया है।

यदि 75 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर 10 हजार बिस्तर से ज्यादा अस्पताल में बिस्तर हैं तो उसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

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