शनि अमावस्या पर तेल चढ़ाने और पीपल पूजन से आती हैं खुशियां
शनिदेव जयंती पर मंगलवार सुबह शनि मंदिरों में भक्तों ने धूमधाम से शनिदेव का तेलाभिषेक किया। इस दौरान मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। शनि अमावस्या पर अपने इष्ट देव के मंत्रों के उच्चारण के साथ आराधना की गई। जीवन में सुख प्राप्ति के लिए मंत्रों का जाप आवश्यक बताया। शनि जयंती को भगवान शनि के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
कहा जाता है कि शनि अमावस्या के दिन शनि भगवान से जुड़े उपाय करने से जीवन में खुशियां आती हैं। इस दिन का स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। कहा जाता है शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। शनिदेव को न्याय के देवता कहा जाता है।
कहते हैं शनि भगवान कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। शनिदेव अपने भोग काल में उन्हीं को नुकसान पहुंचाते हैं जिनके कर्म बुरे होते हैं। जिन जातकों के कर्म अच्छे होते हैं, शनि भगवान उनके साथ अच्छा ही अच्छा करते हैं। मंदिरों में श्रद्धालुओं ने सुबह ही पहुंच कर मन्नतें मांगी। भगवान शनि को तेल चढ़ाकर उनकी पूजा अर्चना की, इसके बाद उन्होंने मंत्रोच्चारण कर मन्नतें मांगी।
सिटी के सेक्टर-8 के शनि मंदिर में पूजा करती महिला।