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3 सौ खंभों की एलईडी लाइट खराब, लगाने वाली कंपनी व पार्षद एक-दूसरे पर कर रहे दोषारोपण

3 वर्ष पहले
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ऊर्जा बचाने के नाम पर शहर में सभी रोड लाइट को एलईडी लाइट में बदलने करीब दस करोड़ रूपए खर्च किए जा रहे हैं और स्थिति यह है कि जिन क्षेत्रों में लाइट लगाई गई ऐसे आठ हजार खंभों में पिछले चार-पांच महीने में खपत में न तो विशेष अंतर पता चल रहा है और न ही लाइट ठीक है। कई क्षेत्रों में लाइट जलते ही खराब हो गई तो कहीं रोशनी इतनी कम है कि सड़क पर अंधेरा रहता है।

सड़क की चौड़ाई के हिसाब से कम वाट के बल्ब लगा दिए गए हैं। दो महीने में 3सौ खंभों में लाइट खराब होने से बंद है। यहां के लोगों के अलावा पार्षद लगातार शिकायत कर रहे हैं। सुराज अभियान में भी दर्जनों लोगों के आवेदन आए हैं लेकिन लाइट ठीक नहीं कराई कराई गई। कंपनी और नगर निगम इस मामले में एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। निगम का कहना है कि मनमाने तरीके से लाइट लगा दिए गए। जहां लाइट खराब हो रही है वहां सुधार नहीं कराया गया। ईईसीएल कंपनी को शहर में रोड लाइट का ठेका मिला है जबकि लाइट लगाने और मेंटनेंस का काम हैवल्स कंपनी को दिया गया था। सात साल तक कंपनी को मेंटनेंस करना है और शुरूआत में ही व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। लाइट खराब होने और रोशनी कम होने के मामले में कंपनी के लोग निगम को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

निगम का आरोप- कंपनी ने मनमाने तरीके से किया काम, कंपनी का तर्क- पार्षदों ने अपने हिसाब से लगवाई है लाइट

जब तक लाइट ठीक नहीं होगी तब तक नो आबजेक्शन सर्टिफिकेट जारी नहीं करेंगे-आयुक्त: नगर निगम आयुक्त सूर्य किरण तिवारी ने बताया कि जहां शिकायत है वहां लाइट ठीक करने कंपनी को कहा है। डायरेक्टोरेट को भी इसकी रिपोर्ट भेजी है। लाइट जब तक ठीक नहीं कराई जाएगी, नो आबजेक्शन सर्टिफेकट जारी नहीं करेंगे।

सड़क की चौड़ाई का ध्यान न रखने से कई इलाकों में रोशनी कम।

अनुबंध के हिसाब से काम नहीं हुआ तो कार्रवाई
नगर निगम के सभापति शफी अहमद ने बताया कंपनी को अनुबंध के हिसाब से काम करना होगा। जहां लाइट खराब होने की शिकायत थी, कंपनी को इस पर ध्यान दिलाया गया है। कंपनी के लोगों ने लाइट ठीक कराने का आश्वासन दिया है। लाइट ठीक नहीं कराई गई तो कार्रवाई की जाएगी।

जिम्मेदार बोले, स्टेट लेवल से सब हो रहा, यहां कौन सुनेगा

योजना से जुड़े अधिकारियों ने कहा ठेके से लेकर सभी प्रक्रिया स्टेट लेवल से हुई है। लक्ष्य मीटर के हिसाब से कहीं काम नहीं हुआ है। शिकायत के बाद भी कोई सुनने को तैयार नहीं है। कंपनी के अधिकारी भी कहते हैं कि अगर कोई शिकायत है तो वे मंत्रालय को लिखें और वहां से निराकरण किया जाएगा।

कोई भी वार्ड क्लियर नहीं हुआ है, जहां सुविधा मिली वहां लगा दिए गए लाइट
सभी 48 वार्डों में करीब दस हजार एलईडी लाइट लगाने है। 8 हजार खंभों में लाइट लगा दिए गए लेकिन कोई भी वार्ड क्लियर नहीं हुआ है। पार्षदों की शिकायत है कि मनमाने तरीके से जहां सुविधा मिली वहां लाइट लगा दी गई ओर बाकी खंभों में काम छोड़ दिया है। स्टीमेट के हिसाब से लाइट आई थी पर बाद में खंभे बढ़ा दिए।

जिस कंपनी को काम दिया उसके पास लक्ष्य मीटर नहीं
सड़क पर रोशनी में दिक्कत न हो इसके लक्ष्य मीटर के हिसाब से वल्ब बदलने थे। सड़क की चौड़ाई और खंभों की हाइट के हिसाब से पड़ताल के बाद बल्ब बदलने थे। खंभे के आसपास और दो खंभों के बीच इस मशीन को रखकर जांच की जाती है कि लक्ष्य के हिसाब से रोशनी है या नहीं। 8 हजार खंभों में मनमाने तरीके से लाइट लगाई गई। वार्डों में लाइट नहीं जलने की शिकायत पर जांच कराई गई तो पता चला कि रोशनी पर्याप्त नहीं है। जिस कंपनी को लाइट लगाने का काम दिया है उसके पास लक्ष्य मीटर ही नहीं है। शिकायत के बाद लक्ष्य मीटर भेजा है पर अधिकारियों का कहना है कि अभी भी इस हिसाब से लाइट नहीं लगाई जा रही है।

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