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पुल बनाने में तय मानकों की अनदेखी, िबना सुरक्षा उपकरण मजदूरों से कराया जा रहा काम
लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग अंबिकापुर उपसंभाग मनेंद्रगढ़ के तहत कोरिया जिले के नवापरी-खडगवां मार्ग के घुरघेला नाला पर उच्च स्तरीय पुल बनवाया जा रहा है। इसकी प्रशासकीय स्वीकृति 21 जुलाई 2016 को हुई थी । उस समय पुल की लागत 432 लाख रखी गई थी । इसके बाद इसकी तकनीकी स्वीकृति 19 अक्टूबर 2016 को 428 लाख पर विभाग द्वारा दी गई। कंस्ट्रक्शन साइट के ठेकेदार मैसर्स त्रिलोकी सिंह ने पुल बनवाने में भारी अनियमितता बरतने की बात सामने आ रही है । ठेकेदार कार्य में गुणवत्तहीनता के अलावा वहां पर कुछ नाबालिगों से भी कार्य करा रहे हैं । जब नाबालिग से पूछा गया तो उन्होंने पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने की बात स्वीकारी ।
जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से 25 किलोमीटर दूर ग्राम घुरघेला नाला पर बन रहा पुल एसडीओ के भरोसे पर है। करोड़ों की लागत से उच्चस्तरीय इस पुल के निर्माण में प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि साइट पर ना तो इंजीनियर और न ही एसडीओ साहब जाते हैं । उनके मार्गदर्शन के बिना ही पुल का निर्माण मजदूरों द्वारा किया जा रहा है । कंस्ट्रक्शन साइट पर मौजूद मजदूरों से पूछताछ पर बताया की विभाग से बीते काफी दिनों से कोई भी अधिकारी काम देखने नहीं आया है। जहां इंजीनियर कंस्ट्रक्शन साइट पर उपस्थित रहकर निर्माण की मॉनिटरिंग करता है ।
428 लाख के बजट से होना है पुल का निर्माण कार्य
पुल बनाने में बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे मजदूर।
काराएंगे जांच: सेतु विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके महापात्रा का कहना है कि नाबालिगों से कार्य कराना नियम विरुद्ध है। ऐसा होगा तो जांच कर ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने जल्द ही विभाग के अधिकारियों को भेज जांच कराने की बात कही। अब देखना होगा कि वह कब जांच कराएंगे।
भास्कर संवाददाता| खड़गवां
लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग अंबिकापुर उपसंभाग मनेंद्रगढ़ के तहत कोरिया जिले के नवापरी-खडगवां मार्ग के घुरघेला नाला पर उच्च स्तरीय पुल बनवाया जा रहा है। इसकी प्रशासकीय स्वीकृति 21 जुलाई 2016 को हुई थी । उस समय पुल की लागत 432 लाख रखी गई थी । इसके बाद इसकी तकनीकी स्वीकृति 19 अक्टूबर 2016 को 428 लाख पर विभाग द्वारा दी गई। कंस्ट्रक्शन साइट के ठेकेदार मैसर्स त्रिलोकी सिंह ने पुल बनवाने में भारी अनियमितता बरतने की बात सामने आ रही है । ठेकेदार कार्य में गुणवत्तहीनता के अलावा वहां पर कुछ नाबालिगों से भी कार्य करा रहे हैं । जब नाबालिग से पूछा गया तो उन्होंने पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने की बात स्वीकारी ।
जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से 25 किलोमीटर दूर ग्राम घुरघेला नाला पर बन रहा पुल एसडीओ के भरोसे पर है। करोड़ों की लागत से उच्चस्तरीय इस पुल के निर्माण में प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि साइट पर ना तो इंजीनियर और न ही एसडीओ साहब जाते हैं । उनके मार्गदर्शन के बिना ही पुल का निर्माण मजदूरों द्वारा किया जा रहा है । कंस्ट्रक्शन साइट पर मौजूद मजदूरों से पूछताछ पर बताया की विभाग से बीते काफी दिनों से कोई भी अधिकारी काम देखने नहीं आया है। जहां इंजीनियर कंस्ट्रक्शन साइट पर उपस्थित रहकर निर्माण की मॉनिटरिंग करता है ।
सब इंजीनियर साइट पर जाते हैं: विभाग के एसडीएस के तिवारी का कहना है कि सब इंजिनियर साइट पर जाते हैं शायद जब आप लोग गये हो तब वो खाने के लिए गए होंगे। मामले में एसडीओ साहब अपने इंजिनियर का बचाव करते दिखे। इससे यह बात साफ स्पष्ट होती है कि जो हो रहा है उसमें एसडीओ साहब की मूक सहमति है।
नाबालिग करते हैं मजदूरी
साईट पर नबालिगों से काम लिया जा रहा है । वहां पर काम कर रहे एक लडके ने बताया कि 8 वीं पढ़ते-पढ़ते 3 साल पहले स्कूल जाना छोड़ दिया । अब गांव का ही पनेश्वर उसे यहां काम कराने लाया है । बालकदास पिता दीलाराम लालपुर मांचाडोली 14-15 दिन से उच्च स्तरीय पुल मंे काम कर रहा है। वहीं पर एक अन्य नाबालिग बांगांे उम्र 16 वर्ष पंचराम पिता साधुराम मांचाडोली भी 3 साल पहले 8 वीं पढ़ते-पढ़ते स्कूल छोड़ दिया 14-15 दिन से काम कर रहा है । पर ठेकेदारों को इस सबसे कोई सरोकार नहीं है।
सभी श्रमिकों का नहीं कराया गया है पंजीयन
पुल मंे काम करने वाले मजदूरांे के लिए सुरक्षा की दृष्टि से हेलमेट गम्बूट कुछ भी ठेकेदार के द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है ऐसे मंे दुर्घटना की स्थिति मंे जान पर बन आना निश्चित है और न हीं श्रम कार्यालय मंे मजदूरांे का पंजीयन ही कराया गया है। पुल निर्माण कार्य मंे 20-22 मजदूर कार्यरत हैं जबकि कुछ ही मजदूरांे का पंजीयन कराया गया है जो कि अब ठेके पर मजदूर लाने की भूमिका निभा रहे है।