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यूनि. का निर्णय-2 माह में पीजी कॉलेज यूजीसी से ले स्वायत्तता की मान्यता, प्रबंधन को आपत्ति
संभाग के अग्रणी पीजी कॉलेज की स्वायत्तता की मान्यता अगले दो महीने में यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) से अगले पांच साल के लिए नहीं मिलने पर सरगुजा यूनिवर्सिटी अगले सत्र से कॉलेज में पीजी संकाय में अपना पाठ्यक्रम संचालित करेगा।
यूनिवर्सिटी ने कार्यपरिषद की बैठक में निर्णय के बाद कॉलेज को पत्र लिखकर इससे अवगत करा दिया है। इससे यदि दो महीने में कॉलेज को यूजीसी से स्वायत्तता के विस्तार की मान्यता नहीं मिली तो अगले सत्र से पीजी संकाय के सभी 17 विभागों में सरगुजा यूनिवर्सिटी का पाठ्यक्रम संचालित होगा। कॉलेज प्रबंधन ने यूनिवर्सिटी के इस निर्णय पर ही सवाल उठाते हुए जल्द ही यूजीसी से कॉलेज के स्वायत्तता की मान्यता मिल जाने की बात कही है। इससे अब कॉलेज में अगले सत्र से पीजी में किसका पाठ्क्रम संचालित होगा इसको लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। यूनिवर्सिटी के इस निर्णय को कॉलेज प्रबंधन ने शासन से अवगत कराने का निर्णय लिया है। कॉलेज के अनुसार यूनिवर्सिटी को इसका अधिकार ही नहीं है। उसे किसी कॉलेज के स्वायत्तता की मान्यता के पत्र को समय पर सिर्फ यूजीसी तक पहुुंचाने का काम है।
2 माह में यूजीसी से स्वायत्तता का नहीं मिला एक्सटेंशन तो अगले सत्र से कॉलेज में यूनि.का पाठ्यक्रम संचालित होगा
यूनिवर्सिटी ने कार्यपरिषद में प्रस्ताव पारित कर लिया निर्णय
स्वायत्तता खत्म का आदेश नहीं आया तो कैसे रखा प्रस्ताव
पीजी कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जब यूजीसी से स्वायत्तता खत्म होने का यूनिवर्सिटी में आदेश आया नहीं तो परिषद में कैसे रखा प्रस्ताव। इस पूरे मामले से अब स्वायत्तता की मान्यता की प्रक्रिया में दोनों संस्थानों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूजीसी से कॉलेज के स्वायत्तता की मान्यता सत्र 2017-18 के लिए है। यानी अगले सत्र 18-19से स्वायत्तता के विस्तार के लिए इसे यूजीसी से मान्यता लेनी है।
कॉलेज में पीजी के 17 विषय हैं आटोनामस, 1000 से ज्यादा छात्र
पीजी कॉलेज में यूजी व पीजी में विभिन्न विषय की पढ़ाई होती है। पीजी में इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल, हिंदी, मनोविज्ञान, राजनीति शास्त्र, रसायन, भौतिकी, गणित, सहित अन्य 17 विषय आटोनामस(स्वशासी) है। कॉलेज ही इसका पाठ्क्रम निर्धारित करता है और परीक्षाएं आयोजित करता है। विभिन्न विषयों में एक हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं।
यूनिवर्सिटी के माध्यम से कॉलेज ने अक्टूबर में भेजा था आवेदन: कॉलेज के अनुसार स्वायत्तता की मान्यता के लिए सरगुजा यूनिवर्सिटी के माध्यम से 26 अक्टूबर 2017 को यूजीसी को आवदेन भेजा गया था लेकिन यूनिवर्सिटी से आवेदन को आगे बढ़ाया नहीं गया। इस बीच यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद की कई बैठकें हुईं लेकिन किसी भी बैठक में पीजी कॉलेज की स्वायत्तता के विषय को नहीं लिया गया जबकि बिना कार्यपरिषद की बैठक में रखे ही आवेदन को यूजीसी को अग्रेषित कर दिया जाना चाहिए था।
कॉलेज को यूजीसी से 1995 में मिली थी स्वायत्तता की पात्रता
पीजी कॉलेज को यूजीसी से 1995 में आटोनामस कॉलेज की पात्रता मिली थी। इसके बाद से यूजीसी द्वारा पांच-पांच साल के लिए विस्तार किया जाता रहा। विस्तार से पहले कॉलेज के आवेदन पर यूजीसी की टीम कॉलेज का दौरा कर यहां की व्यवस्था को देखकर स्वायत्तता के लिए अनुमति देती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
यूनिवर्सिटी को इस तरह का निर्णय लेने का अधिकार नहीं
पीजी कॉलेज की स्वायत्तता की पात्रता खत्म करने का अधिकार सरगुजा यूनि. को नहीं है। हमने समय से पहले यूनि. के माध्यम से स्वायत्तता के विस्तार का आवेदन यूजीसी को भेजा था। यूनि. को इसे आगे अग्रेषित करना था। यूनि. के निर्णय के बारे में शासन को जानकारी दी जाएगी। वैसे भी कॉलेज को यूजीसी से स्वायत्तता की मान्यता मिल जाएगी। कॉलेज द्वारा सीधे भेजे आवेदन को यूजीसी ने स्वीकार कर लिया है। यूजीसी की टीम गठन होने के बाद निरीक्षण के लिए आएगी। -डाॅ. एसके त्रिपाठी, प्राचार्य पीजी कॉलेज, अंबिकापुर
यूजीसी से कॉलेज के स्वायत्तता की जून 2017 में ही हो गई खत्म
यूजीसी से पीजी कॉलेज के स्वायत्तता की मान्यता जून 2017 में खत्म हो गई है। कॉलेज प्रबंधन द्वारा स्वायत्तता के विस्तार के लिए समय पर यूजीसी को आवेदन करना चाहिए था पर उन्होंने वैसा नहीं किया। स्वायत्तता के संबंध में दो माह का समय पीजी कॉलेज को दिया है। यूजीसी से यदि उन्हें स्वायत्तता के विस्तार की मान्यता मिलती है तो ठीक नहीं तो अगले सत्र से हमारा पाठ्यक्रम संचालित होगा, क्योंकि छात्रों को डिग्री यूनि. देती है। -प्रो. रोहिणी प्रसाद, कुलपति, सरगुजा यूनिवर्सिटी, अंबिकापुर