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जिले के 90 में से 85 एटीएम ड्राई, रुपए निकालने 15 से 20 किमी जा रहे लोग, बड़े नोटों की कमी

3 वर्ष पहले
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नोटबंदी के डेढ़ साल बाद कथित रूप से कैश की कमी से बैंकों के एटीएम एक बार फिर ड्राई हो गए हैं। कैश की जरूरत के लिए लोग एटीएम के चक्कर लगा रहे हैं पर उन्हें पैसा नहीं मिल रहा है।

शहर से लेकर ब्लाॅक मुख्यालय के बैंकों के एटीएम में यही स्थिति है। लोग परेशान हैं पर बैंक भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके पास एटीएम में कैश डालने 500 व 2000 के पर्याप्त नोट ही नहीं हैं। वे एटीएम में 100 व 200 के नोट डाल रहे हैं तो कुछ घंटे में कैश खत्म हो जा रहा है। जिले में विभिन्न बैंकों के 90 एटीएम हैं इनमें 95 फीसदी ड्राई हो गए। भास्कर ने मंगलवार को एटीएम के ड्राई होने व लोगों की परेशानियों को लेकर पड़ताल की। बैंकर्स के अनुसार 2000 व 500 के नोट की कमी है। आरबीआई से भी इनकी सप्लाई नहीं हो रही है। इससे चेस्ट ब्रांच से एटीएम में 100 व 200 के नोट ही एटीएम में लोड किए जा रहे हैं। इससे एक बार में एटीएम में 5 से 8 लाख ही लोड हो रहे हैं। यदि 500 व 2000 के नोट होते तो एक बार में एटीएम में 20 से 25 लाख लोड होते हैं। इससे एटीएम जल्द खाली नहीं होते हैं।

कई चक्कर लगाकर भी एटीएम से खाली हाथ लौटे, 2000 व 500 के नोट का शार्टेज

दो बैंक के 15 सौ से अधिक स्वाइप मशीन पंजीकृत

स्टेट बैंक व सेंट्रल बैंक के ही 15 सौ से अधिक स्वाइप मशीनें पंजीकृत हैं। इनमें स्टेट बैंक की ही 12 स्वाइप मशीन हैं पर इनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल नहीं होता है। सरकारी संस्थानों में दी स्वाइप मशीनें तो अब कहीं नजर नहीं आती है। शासन ने थाने से लेकर स्कूल कालेजों में स्वाइप मशीनें लगाई थी ताकि कैश की जगह वहां एटीएम से फाइन सहित शुल्क जमा किए जाए पर ऐसा कहीं होता नहीं है।

लटोरी से अंबिकापुर गया पर वहां से भी खाली हाथ लौटा

शहर से 15 किमी दूर लटोरी निवासी दिलेश्वर प्रसाद राजवाड़े के घर में भतीजे की इसी महीने शादी है। वह लटोरी के ग्रामीण बैंक में पैसा निकालने गया था। वहां भीड़ देख वह अंबिकापुर यह सोचकर आया कि यहां पैसा निकालने के बाद खरीददारी कर लेगा पर उसे एटीएम के ड्राई होने से परेशानी हुई।

पैसे नहीं निकलने पर चचेरी बहन की शादी में नहीं जा पाया: ग्राम रकेली नवानगर निवासी सुनील कुमार की थी। उसे भी अपनी चचेरी बहन की शादी में जाने के लिए पैसे की जरूरत थी। उसे भी किसी एटीएम में पैसा नहीं मिला। यह स्थिति लगभग सभी बैंकों की है। बैंक प्रबंधन दिक्कत तो मान रहे हैं लेकिन वे बैंकों में कैश की कमी से इनकार कर रहे हैं।

दोपहर में स्टेट बैंक मेन ब्रांच के एटीएम में कैश लोड होते लग गई लाइन।

आरबीआई से चेस्ट ब्रांचों को डिमांड से कम सप्लाई

कैश शार्टेज की बात बैंकर्स सीधे मान तो नहीं रहे हैं लेकिन चेस्ट ब्रांचों को आरबीआई डिमांड से कम मात्रा में कैश की सप्लाई कर रही है। चेस्ट ब्रांच को तीन महीने में आरबीआई एक से दो बार कैश देता है। शहर के स्टेट बैंक को मांग की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम कैश आरबीआई से मिला।

सेंट्रल बैंक के 4 एटीएम से 12 घंटे में 50 लाख का ट्रांजेक्शन

सेंट्रल बैंक के शहर में पांच एटीएम हैं। इनमें से एक एटीएम तकनीकी कारण से खराब है। बैंक के चार एटीएम चालू हैं। बैंक के रीजनल आफिस के अनुसार शहर के चार एटीएम में 16 अप्रैल को कुल 50 लाख रुपए लोड किए गए लेकिन 12 घंटे में ही सभी एटीएम खाली हो गए।

क्या कहते हैं अधिकारी

स्टेट बैंक के एटीएम ज्यादा इसलिए दिक्कत

कैश की कमी तो हैं लेकिन बैंकों में ग्राहकों के लिए पर्याप्त राशि है। स्टेट बैंक के अन्य बैंकों की तुलना में ज्यादा एटीएम हैं। इससे दूसरे बैंक के ग्राहक भी हमारे एटीएम से कैश निकालते हैं और हमारे एटीम ड्राई हो जा रहे हैं। यह समस्या कुछ दिनों की ही है। -बी रामामनी, रीजनल मैनेजर, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया

कैश की समस्या नहीं छोटे व बड़े नोट पर्याप्त

सेंट्रल बैंक के चेस्ट में कैश की कोई समस्या नहीं है। बड़े व छोटे नोट पर्याप्त हैं। अभी शादी व खेती के काम से कैश की जरूरत ज्यादा पड़ती है इसलिए एटीएम में मांग बढ़ गई है। वैसे लोगों को अब डिजिटल ट्रांजेक्शन पर जोर देना चाहिए। इसके कई माध्यम उपलब्ध हैं। -एन. उन्नीकृष्णन, रीजनल मैनेजर, सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया

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