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वन विभाग के पास नहीं थी ट्रैंक्यूलाइज गन में दवा बिलासपुर से मंगाई तब पकड़ा, अभयारण्य में छोडे़ंगे
फुंदुरडिहारी मोहल्ले में बुधवार को जंगल से भटके एक भालू को पकड़ने वन विभाग के पास ट्रैंक्यूलाइज गन की दवा नहीं थी। बिलासपुर के अचानकमार अभ्यारण्य से दवा मंगाने के बाद उसे बेहोश कर काबू पाया। हालांकि डीएफओ प्रियंका पांडेय ने कहा ट्रैंक्यूलाइज करने एक्सपर्ट टीम की जरूरत होती है इसलिए बिलासपुर से दवा मंगाई गई। विशेषज्ञों से फोन पर निर्देश लेकर स्थानीय चिकित्सक ने भालू को ट्रैंक्यूलाइज किया। उन्होंने यहां दवा के नहीं होने के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
यहां भालू एक घर के पीछे बाड़ी में छिपा था। शाम को बिलासपुर से दवा पहुंची। इसके एक घंटे पहले भालू घेरा तोड़ बाहर आ गया, इससे अफरा-तफरी मच गई। शाम को दवा पहुंचनी तो दो कोशिशोंं के बाद भालू को ट्रैंक्यूलाइज कर काबू किया गया। भालू को स्थानीय वैटनरी चिकित्सकों की टीम ने डार्ट मार बेहोश किया। भालू को अब तैमोर पिंगला अभ्यारण्य में छोड़ेंगे। भालू को पकड़ने में 12 घंटे से ज्यादा समय लग गया। इससे व्यवस्था की पोल खुल गई। सुबह एसपी सदानंद कुमार, जिला पंचायत सीईओ नम्रता गांधी, सीसीएफ के के बिसेन, डीएफओ प्रियंका पांडेय, एडिशनल एसपी आरके साहू, एसडीएम अजय त्रिपाठी, सीएसपी आरएन यादव सहित अन्य अधिकारी पहुंचे। जवान पूरे दिन तैनात रहे।
कुछ ही महीने पहले वनविभाग को एेसी स्थिति से निपटने दिया गया था प्रशिक्षण, डीएफओ का जवाब- हमारे पास नहीं थे एक्सपर्ट
यहां दवा न होने के कारण दिन भर करना पड़ा इंतजार
मंगलवार की घटना ने शहर में जंगली जानवरों के घुस आने के बाद उसे पकड़ने वन विभाग की तैयारियांे की पोल खोल दी है। कुछ महीने पहले ही एैसी स्थिति से निपटने विभाग की टीम को प्रशिक्षण दिया गया था। आज उम्मीद थी कि इसका फायदा मिलेगा पर जब भालू आया तो पता चला कि वन विभाग की ट्रैंक्यूलाइज गन तो ठीक है पर उसमें बेहोशी की दवा केटामीन व जैलाजीन नहीं है। अब अधिकारी बता रहे हैं कि दवा की एक्सपायरी डेट एक महीने ही बची थी। इसलिए उपयोग में लाने के लिए उसे मंगलवार को ही अचानकमार अभयारण्य भेज दिया गया।
दवा नहीं होने से ट्रैंक्यूलाइज मशीन उपयोग नहीं कर पाया
लोगों ने भालू को सुबह साढ़े 5 बजे फुंदरडिहारी के धोबीपारा में देखा था। यहां से वह बाड़ी में घुस गया। उसे पकड़ने बाड़ी को चेनलिंक फेंसिंग कर काले रंग की पालीथीन से चारों ओर से घेरा गया। 2 जगह पिंजरे लगाए, उसमें महुआ व शहद रखा पर भालू नहीं निकला। बेहोशी की दवा नहीं होने से विभाग अपनी ट्रैंक्यूलाइज मशीन इस्तेमाल नहीं कर पाया। ट्रैंक्यूलाइज कर भालू को पकड़ने अचानकमार अभ्यारण्य से बेहोशी की दवा मंगाई।
भालू को डार्ट लगा बेहोश करने वाले डाॅ. मिश्रा को वन विभाग सम्मानित करेगा।
पास के घरों को खाली करा एरिया को किया सील
सुरक्षा को देखते हुए पुलिस व वन विभाग ने अनिमा प्रकाश सहित आसपास के घरों को खाली करा दिया। इसके बाद बाड़ी में जहां भालू बैठा था, उसे चारों ओर से फेंसिंग कर एरिया को सील कर दिया गया। पुलिस के सशस्त्र जवान तैनात रहे। बाड़ी वाले इलाके में लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया ताकि कोई हादसा न हो।
सर्कस से मंगाया जाल, नहीं पड़ी जरूरत: भालू के पकड़ने पहले चारों तरफ चैन लिंक फेंसिंग कर उसे घेर लिया गया। दोनों तरफ दो बड़े पिजरे लगाए गए पर दोपहर तक जब वह झाड़ियों से बाहर नहीं आया तो अधिकारियों ने उसे पकड़ने के लिए गांधीनगर में चल रहे सर्कस से जाल मंगाया। हालांकि इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आई।
अहाता पर चढ़ा भालू
ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद भागकर बेहोश हो गया भालू
बाड़ी में लगा घेरा तोड़ने के बाद भालू कूदकर दूसरे घर की बाउंड्रीवाल के पास सड़क में खड़ा हो गया। इस बीच बिलासपुर से दवा भी पहुंच गई। शहर के वैटनरी डाॅक्टर सीके मिश्रा व उनकी टीम ने पास की छत से भालू को ट्रैंक्यूलाइज कर बेहोशी की इंजेक्शन के दो डार्ट लगाए। यह पहली बार है जब स्थानीय किसी पशु चिकित्सक ने किसी वन्य प्राणी को टैंक्यूलाइज किया। इंजेक्शन लगाने के बाद भालू बाउंड्रीवाल फांदकर दोबारा उसी बाड़ी की झाड़ियों में घुस गया पर बेहोश नहीं हुआ। इसके थोड़ी देर बाद उसे फिर ट्रैंक्यूलाइज करने डार्ट लगाए तब जाकर वह बेहोश हुआ।
सुखरी या पिल्खा पहाड़ से भटककर आने की संभावना
भालू किस तरफ से गांधीनगर इलाके मेें घुसा इसका पता नहीं चला है। वन विभाग आशंका जता रह है कि शहर से लगे पिल्खा पहाड़ या सुखरी के जंगल से भटककर भालू भगवानपुर, सुभाषनगर होते हुए गांधीनगर पहुंचा होगा। पिल्खा व सुखरी के जंगल में काफी भालू हैं। दोनों क्षेत्र गांधीनगर से पास हैं।
इससे पहले भी कई बार शहर तक आ चुके हैं भालू
शहर में भालू के घुसने का यह पहला मामला नहीं है। पहले भी कई बार शहर में भालू घुस चुके हैं। कुछ साल पहले सर्किट हाउस में एक भालू घुस आया था। मशक्कत के बाद जब वह पकड़ा नहीं जा सका तो सीआरपीएफ के एक जवान ने उसे गोली मार दी थी। इसके बाद पैलेस के पीछे बीही बाड़ी वाले इलाके में भालू आया था। उसे पकड़ने कवायद की गई पर आखिरी में वह भाग निकला। मायापुर इलाके में 3 दशक पहले एक घर में भालू घुसा था। हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। और कई बार भालू शहर तक आ चुके हैं। पिछले वर्षों में हाथी दो बार शहर के रिहायशी इलाकों में पहुंच गए थे।
पहले घेरे को तोड़कर बाहर निकल गया भालू
बिलासपुर से ट्रैंक्यूलाइज करने वाली दवा के आने का यहां इंतजार चल रहा था। इसी बीच शाम को करीब चार बजे भालू अचानक झाड़ियों से निकला। इससे वहां दहशत मच गई। वन विभाग का अमला व पुलिसकर्मी कुछ समझ पाते इससे पहले ही भालू तार के फेंसिंग को तोड़ने के बाद बाउंड्रीवाल को फांदकर दूसरी तरफ सड़क में जाकर खड़ा हो गया। इससे पुलिस ने आस-पास के सभी रोड को ब्लाक कर दिया।