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अंबिकापुर ने फिर मारी बाजी, कचरा उठाने वाली गाड़ियों में जीपीएस ने दिलाया इनोवेशन में पहला स्थान

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | अंबिकापुर

स्वच्छता अभियान में अंबिकापुर ने एक बार फिर बाजी मार ली है। पिछले साल देश में दो लाख की आबादी वाले शहरों मंे अंबिकापुर नंबर वन था जबकि इस बार स्वच्छता में इनोवेशन का देश भर में पहला पुरस्कार मिला है। स्वच्छता में नए प्रयोग यानि बेस्ट प्रैक्टिस लिए अंबिकापुर को यह उपलब्धि हासिल हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए देश के 4200 शहरों को शामिल किया गया था। एक से तीन लाख की आबादी वाले शहरों में अंबिकापुर को देश में पहला स्थान दिया गया है। दो साल पहले अंबिकापुर में यह अभियान शुरू हुआ था और अब देश को इस अभियान में नई राह दिखाई है। देश भर में 4 हजार से अधिक शहरों में अंबिकापुर ने अपना दबदबा कायम रखा है। इस बार अभियान में कुछ नए प्रयोग और बेस्ट प्रैक्टिस के कारण अंबिकापुर को यह इनाम मिला है।

अंबिकापुर की तर्ज पर देश के कई शहरों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुरू हो गया था। अंबिकापुर ने इससे आगे बढ़कर कचरे का निबटारा और इससे आय का जरिया तैयार किया। घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे निगम के लिए आय का जरिया बन गए हैं और दो साल में अंबिकापुर को इस अभियान में एक करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी हुई है। सूखे कचरे को अलग कर कबाड़ में बेचा जाता है जबकि गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। पूरे अभियान की जीपीएस सिस्टम से ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। खास बात यह है कि पूरा अभियान चार सौ से अधिक महिलाओं के दम पर संचालित हो रहा है। पिछले साल देश में नंबर वन आने के बाद अंबिकापुर में देश के कई बड़े शहरों की यह कार्यशाला हुई थी। अभियान में एक और खास बात यह है शहर पूरे प्रदेश में सबसे पहले ओडीएफ हो गया था। शहर में 2 दर्जन से अधिक सार्वजनिक टॉयलेट की लोकेशन ऑनलाइन किए गए हैं। बुर्जुगों के साथ महिलाएं और बच्चों के लिए इसमें अलग-अलग व्यवस्था की गई है।

वेस्ट मैनेजमेंट माॅडल और अभियान की बेहतर मानिटरिंग ने स्थिति की मजबूत

घरों से कचरा कलेक्शन कर एसएलआरएम सेंटर में किया जाता है निबटारा, एलएमआरएम सेंटर से बिक्री के लिए ले जा रहे कचरा।

पिछले साल स्वच्छता के लिए इन पर था फोकस

पिछले साल दो लाख की आबादी वाले शहरों में देश में नंबर वन था अंबिकापुर

शहर के सभी 48 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कर किया जाता है निपटारा

जानिए... अंबिकापुर को स्वच्छता में नंबर वन लाने ये कदम रहे कारगर

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एसएलआरएम सेंटरों के मानिटरिंग के लिए सीसी कैमरे लगाए गए जबकि पूरे अभियान की जीपीएस सिस्टम से निगरानी की व्यवस्था की गई है।

17 एसएलआरएम सेंटर बनाए गए हैं वार्डों में जहां किया जाता है कचरे का निपटारा

पूरा अभियान महिलाओं के माध्यम से हो रहा संचालित, 447 महिलाएं जुड़ी हैं अभियान से

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डोर टू डाेर कचरे के कलेक्शन और उसके निपटारे की रिकार्डिंग की जाती है

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कचरे के कलेक्शन ओर इसके निपटारे से हो रहे आय-व्यय का पूरा हिसाब किताब कंप्यूटराइज किया गया है

पिछले साल देश में नंबर वन आने के बाद बढ़ गई थी चुनौती फिर भी सब पर भारी

पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में अंबिकापुर 2 लाख की आबादी वाले शहरों में देश में नंबर वन आने के बाद मैसूर, हरियाण, सूरत, मुंबई जैसे साधन सुविधाओं वाले बड़े शहरों को चौका दिया था। अंबिकापुर को स्वच्छता में यह मुकाम मिलने के बाद इस साल चुनौती बढ़ गई थी क्योंकि अंबिकापुर के वेस्ट मैनजमंेट मॉडल की तर्ज पर कई शहरों में अभियान शुरू हुआ था पर अंबिकापुर इसके बाद भी बड़े-बड़े शहरों पर भारी पड़ा।

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सार्वजनिक टॉयलेट ऑनलाइन किए हैं जबकि स्थिति पर नजर रखने मशीनें लगाई हैं जिसमें लोग टॉयलेट अच्छा या नहीं, इसका बटन दबा अनुभव बताते हैं।

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डोर टू डोर कलेक्शन में निकलने वाले सूखे कचरे को अलग कर कबाड़ में की जाती है बिक्री, जबकि गीले कचरे से बनाई जा रही है खाद

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निगम को दो साल में कचरे की बिक्री व कलेक्शन चार्ज से एक करोड़ की हो चुकी है आमदनी

25 से 30 फीसदी लोग सड़कों

पर फेंक रहे कचरा, सख्ती

की जरूरत



अंबिकापुर स्वच्छता में नंबर वन आ गया है पर अभी भी कई चुनौतियां हैं

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बावजूद 25 से 30 फीसदी ऐसे भी लोग हैं, जो कचरा नहीं दे रहे हैं बल्कि वे सड़कों पर फेंक रहे हैं।

नगर निगम द्वारा सड़कों पर आ रहे कचरों को राेकने के लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

पहली बार पकड़े जाने पर 200 रुपए, उसके बाद 5 सौ रुपए जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद जुर्माना लगाना बंद कर दिया गया है।

निगम में स्वच्छता अभियान के नोडल अधिकारी रितेश सैनी का कहना है कि अब इस पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

सेंट्रल की टीम ने सर्वेक्षण में 15 दिनों तक की थी अभियान की पड़ताल

जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण हुआ था और सेंट्रल की टीम ने पंद्रह दिनों तक शहर में अभियान की पड़ताल की थी। घराें से कचरा कलेक्शन से लेकर एसएलआरएम सेंटरों कचरे के निपटारे के साथ सड़कों पर सफाई, सार्वजनिक टॉयलेट जैसे बिन्दुओं पर गहन पड़ताल की गई थी। अंबिकापुर नंबर वन था इसलिए पूरे प्रदेश में इतनी पड़ताल किसी और शहर में नहीं हुई थी। एक महीने बाद सेंट्रल की टीम से फिर क्रास चेकिंग कराई गई कि कहीं कुछ दिखावा तो नहीं किया गया था।

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