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सेंट्रल जेल के 60 कैदी उल्टी-दस्त से गंभीर, एक की मौत, दो रायपुर रेफर

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | अंबिकापुर

सेंट्रल जेल में उल्टी-दस्त से कई कैदी व बंदी बीमार हो गए हैं। यहां से पिछले दो तीन दिनों में रोज चार से पांच मरीजों को मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बुधवार को अस्पताल में भर्ती एक कैदी की मौत हो गई। उल्टी-दस्त की शिकायत पर उसे मंगलवार की शाम को यहां भर्ती कराया गया था। अस्पताल के जेल वार्ड में गंभीर रुप से पीड़ित 16 कैदियों का इलाज चल रहा है। उधर जेल के अंदर अस्पताल में 40 से ज्यादा बंदियों को भर्ती कराया गया है। उन्हें भी दस्त की शिकायत बताई जा रही है पर प्रबंधन जेल में अस्पताल में भर्ती बीमार कैदियों को अलग-अलग रोग से पीड़ित होना बता रहा है। इधर जेल से बीमार बंदियों की संख्या अचानक बढ़ने से अस्पताल के जेल वार्ड में जगह की कमी पड़ गई, कुछ बंदियों को मेडिसीन वार्ड में भर्ती कराया गया।

सेंट्रल जेल में सजा काट रहे कैदी पालन लोहार 27 वर्ष को मंगलवार को उल्टी दस्त की शिकायत होने पर शाम को जेल से लाकर मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत काफी गंभीर थी। यहां इलाज के बाद भी उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। पालन लोहार जशपुर जिले के टोंगरी थाना अंतर्गत बटईकेला का रहने वाला था और अनाचार के मामले में उसे 10 वर्ष की सजा हुई थी। कोर्ट से सजा होने के बाद उसे जशपुर से अंबिकापुर के सेंट्रल जेल में कुछ महीने पहले ही शिफ्ट किया गया था।

अस्पताल के जेल वार्ड में जगह कम पड़ने से कुछ को मेडिकल वार्ड में कराया भर्ती

मेडिकल कालेज अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती कैदी

अलग-अलग जगह से उल्टी-दस्त के 38 अन्य मरीज भर्ती

मौसम में हो रहे बदलाव से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है। इससे अस्पताल में रोज उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यहां के आसोलेशन वार्ड में जगह कम पड़ने से बरामदे में जमीन पर लिटाकर मरीजों का इलाज चल रहा है। आइसोलेशन वार्ड में अलग-अलग जगह के 38 मरीज भर्ती हैं। इनमें सूरजपुर जिले के प्रेमनगर थाना अंतर्गत रमेशपुर के पांच मरीज भी शामिल है। इसी प्रकार शहर सहित अन्य जगह के मरीज यहां भर्ती है।

सेंट्रल जेल में लगभग ढाई हजार कैदी है बंद: संेट्रल जेल में अलग-अलग मामलों में लगभग ढाई हजार से कैदी बंद है। यहां के जेल की क्षमता डेढ़ हजार की है। इससे यहां की व्यवस्था प्रभावित होती है। हालांकि प्रबंधन इससे इनकार करता है लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बंदियों के बीमार होने से इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कहीं फूड प्वाइजनिंग का मामला तो नहीं?: जेल में अचानक उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ने से फूड प्वाइजनिंग की आशंका है। बंदियों का इलाज करने वाले डाक्टरों के अनुसार उल्टी दस्त की बीमारी फूड प्वाइजनिंग से होती है। वहां से पिछले दो तीन दिनों में जो भी मरीज आए उनको उल्टी-दस्त की शिकायत है। इससे फूड प्वाइजनिंग से इनकार नहीं किया जा सकता।

जेल वार्ड में 16 बंदियों का हो रहा इलाज

मेडिकल कालेज अस्पताल के जेल वार्ड में उल्टी दस्त से पीड़ित 16 बंदियों का इलाज चल रह रहा है। इनमें से मदनलाल 25 वर्ष, गुलाब चौहान 38 वर्ष, कार्तिक यादव 40 वर्ष, रबलू 26 वर्ष, राय सिंह 60 वर्ष, राजेश 21 वर्ष, कुंवर साय40 वर्ष, महल साय 38 वर्ष, प्रमोद मिंज 28 वर्ष, जैतू मांझी 28 वर्ष, रामनंदन 50 वर्ष सहित अन्य शामिल हैं। इनमें से छह बीमार बंदियों को अस्पताल में बुधवार को भर्ती कराया गया जबकि अन्य को सोमवार व मंगलवार के बीच में यहां भर्ती कराया गया। दो बंदियों को रायपुर भी रिफर किया गया है।

जगह कम, मेडिकल वार्ड में शिफ्ट किया

मेडिकल कालेज अस्पताल में जेल वार्ड की क्षमता पांच बेड की है। बीमार बंदियों की संख्या बढ़ने पर वार्ड के अंदर ही फ्लोर पर बेड लेकर दो-तीन बंदियों को भर्ती कर दिया जाता है लेकिन अचानक 16 मरीज होने से वार्ड में जगह कम पड़ गई। इससे आधे मरीजों को मेडिकल वार्ड में बुधवार को शिफ्ट किया गया। इससे अब मेडिकल वार्ड में भर्ती बंदियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था में जवान लगाने पड़ रहे हैं।

गर्मी से कैदियों की तबीयत बिगड़ी है

गर्मी के कारण कुछ कैदियों को उल्टी-दस्त की शिकायत है। महामारी की स्थिति नहीं है। अस्पताल में जिस कैदी की मौत हुई उसे कल ही भर्ती कराया गया था। जेल के अस्पताल में जो भर्ती हैं वे अलग-अलग बीमारी से भर्ती है। राजेंद्र गायकवाड़, जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल अंबिकापुर

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