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केंद्रीय गृहमंत्री बोले- नक्सली चाहते हैं कि वनवासी गरीबी और जलालत झेलते रहें

3 वर्ष पहले
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कौन कहता है कि प्रतिभाएं सिर्फ शहरों में ही पैदा होती हैं, छत्तीसगढ़ के बस्तर के वनवासियों में भी वह प्रतिभा व क्षमता मौजूद है और आज उन्होंने यह साबित कर दिया है। जरूरत पड़ने पर यह बटालियन देश में कहीं भी अपने पराक्रम का प्रदर्शन करेगा। यह बातें केपी गांव स्थित सीआरपीएफ के अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र में 241 वीं बटालियन बस्तरिया वारियर्स के जवानों का शानदार पासिंग आउट परेड के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने कही।

सीआरपीएफ में तैयार पहली बस्तरिया फोर्स के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह विकास करना चाहते हैं लेकिन माओवादी नहीं चाहते कि विकास हो। वे चाहते हैं कि जनजाति गरीब रहे और जलालत की जिंदगी गुजारते रहें। दूसरी ओर बड़े नक्सली नेता अपने परिवार के लिए सारे सुख-सुविधाएं जुटा रहे हैं। इनके बच्चे नामी स्कूल-कालेजों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसी गाढ़ी कमाई करने वाले नक्सलियों को हम दंडित करेंगे। इस दौरान गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, सांसद कमलभान सिंह, सांसद रामविचार नेताम, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह व्हीआर सुब्रह्मण्यम, डीजीपी एएन उपाध्याय, सीआरपीएफ के अतिरिक्त डीजीपी कुलदीप सिंह, पुलिस महानिरीक्षक संजय अरोरा, कमिश्नर अविनाश चम्पावत, सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु गुप्ता, कलेक्टर किरण कौशल, एसपी सदानंद कुमार आदि उपस्थित थे।

देश के किसी भी कोने में बस्तरिया बटालियन अपना पराक्रम दिखाने तैयार

नक्सलवाद खत्म कर बस्तर को बनाएंगे शांति का टापू

मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कहा कि बस्तरिया बटालियन के गठन का निर्णय ऐतिहासिक था। बस्तर के इन युवाओं की दृढ़ इच्छा शक्ति आज नजर आई। यही लोग नक्सलवाद को समाप्त कर बस्तर को एक दिन शांति का टापू बनाएंगे। इनके भीतर का आत्मविश्वास झलक रहा है। बस्तर का देश में मान सम्मान बढ़ाएंगे। इनका डीएनए बस्तर की तरह मजबूत नजर आ रहा है। देश के लिए खुद को न्यौछावर करने तैयार इन युवाओं को कोई पराजित नहीं कर पाएगा।

उनका अभिनंदन जिन्होंने बहादुर बच्चों को जन्म दिया

दीक्षांत समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की मौजूदगी में बस्तरिया बटालियन के जवानों ने मार्च पास्ट कर अतिथियों काे सलामी दी। इससे पहले गृहमंत्री ने खुली जिप्सी में परेड का निरीक्षण किया। परेड व मार्च पास्ट के बाद गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर के उन परिवारों का मैं अभिनंदन करता हूंं जिन्होंेने वीर बहादुर बच्चांे को जन्म िदया है।

बस्तरिया वारियर्स के ये रहे 12 विशिष्ट प्रशिक्षणार्थी

आल राउंड बेस्ट- संदीप कुमार

बेस्ट इन आउटडोर- गणेश कुमार

बेस्ट इन इनडोर- नागेश कुमार नाग

बेस्ट इन वैपन हैंडलिंग- इतेंेद्र कुमार

पासिंग आउट परेड के दौरान जवानों से मुलाकात करते केंद्रीय गृहमंत्री।

आदिवासी समाज देशभक्त इसलिए नियम किए शिथिल

नक्सलवाद एक संकट है पर पिछले कुछ सालों में केंद्र व राज्य सरकार के समन्वय से माअोवाद उग्रवाद में 50 प्रतिशत से ज्यादा कमी आई है। सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज बहुत देशभक्त है और हर चुनौती के समय हमेशा उनका योगदान रहा है। इसलिए नियमों को शिथिल कर बस्तर क्षेत्र के नौजवानों को बस्तरिया बटालियन में भर्ती होने का मौका दिया।

बेस्ट इन ड्रिल- ललित कुमार

बेस्ट इन फिजिकल ट्रेनिंग- भूपेश्वर

बेस्ट फायरर- मारपल्ली विजय

बैटल आब्सटेकल असाल्ट कोर्स -मुकेश

नक्सलियों के खिलाफ लोहा लेने तैयार हैं जवान

केन्द्रीय सुरक्षा बल के महानिदेशक आरआर भटनागर ने कहा कि बस्तर बटालियन में भर्ती के बाद इन जवानों का 44 सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा हो गया है और अब ये माओवाद प्रभावी बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ लोहा लेने के लिए तैयार हैं। इस अवसर पर उप कमाडेंट प्रभात कुमार सिंह ने प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले जवानों को शपथ दिलाई।

बेस्ट इन स्पोर्ट्समैन- विरेंद्र कुमार

आल राउंड बेस्ट महिला- गायत्री बघेल

बेस्ट इन बीओएसी- सुकमती

बेस्ट फायरर- रीना तेलम

44 हफ्ते गुरिल्ला वार की कड़ी ट्रेनिंग ली है जवानों ने

अंबिकापुर| सीआरपीएफ का बस्तरिया बटालियन बस्तर में अब नक्सलियों से लड़ने तैयार है। सोमवार को प्रशिक्षण केंद्र केपी में पासिंग आउट परेड के बाद इन जवानांे को नक्सलियांे के गढ़ बस्तर में तैनात कर दिया जाएगा। बीजापुर की अनिता व संध्या मांझी जैसी कई अन्य साहसी युवतियां बटालियन में जगह मिलने पर गौरवान्वित महसूस करती हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों से अब उन्हें व परिवार को खतरा ताे रहेगा लेकिन वे विकास में बाधक बने इन तत्वोंे के खिलाफ लड़ने तैयार हैं। इलाके के लोगों को अब हम नक्सलियों और उनकी विचारधारा के खिलाफ जागरुक करेंगे।

कम खाकर भी जंगल में लड़ने की मिली है ट्रेिनंग

पिछले साल अप्रैल में अस्तित्व में आए बस्तरिया बटालियन के जवानों को शारीरिक मापदंड में भले ही छूट दी गई हो लेकिन प्रशिक्षण में कोई ढिलाई नहीं बरती गई है। इनका 44 हफ्ते तक प्रशिक्षण चला। एटीसी बिलासपुर एवं एटीसी अंबिकापुर में प्रशिक्षण के दौरान जवानों ने गुरिल्ला युद्ध, कम खाने के बाद भी वहां रहकर लड़ना एवं जंगल युद्ध की सभी तकनीक सिखाई गई है। पासिंग आउट के बाद अब ये जवान सामान्य ड्यूटी एवं कोबरा बटालियन के साथ नक्सलियांे से लड़ने के लिए तैनात किए जाएंगे।

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