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अस्पताल का निर्माण अप्रैल में करना था पूरा, अभी आधा भी नहीं हुआ, एमसीआई के सामने होगी दिक्कत

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | अंबिकापुर

एमसीआई के नार्म्स के अनुसार मेडिकल काॅलेज अस्पताल में प्रस्तावित नई ओटी, रेडियोलाजी , लेक्चरहाल सहित विभिन्न विभागों के भवन का काम लेटलतीफी के कारण पूरा नहीं हो पाया। 3 करोड़ के काम अप्रैल तक पूरे हो जाने थे लेकिन यहां अभी तक आधा भी काम पूरा नहीं हो पाया है। किसी भवन का काम डोर लेवल तक हुआ है तो किसी का प्लिंथ काम ही चल रहा है। अब एक महीने बाद बारिश भी शुरू हो जाएगी। इधर अगले सत्र(वर्ष19-20) के लिए अक्टूबर के बाद एमसीआई की टीम कभी भी यहां निरीक्षण पर आ सकती है। इससे फिर मान्यता को लेकर दिक्कत हो सकती है, क्योंकि अभी तक बिशुनपुर में प्रस्तावित काॅलेज की मेन बिल्डिंग के निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति भी नहीं मिली है।

काम में तेजी नहीं आने से अस्पताल प्रबंधन परेशान है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अब उसके सामने अस्पताल के लिए सीजीएमएससी से आ रहे उपकरण व संसाधानों के रखने की समस्या हो गई है। नई भवन के बनने के बाद ओटी सहित रेडियोलाजी और कुछ ओपीडी उसमें शिफ्ट होंगे। इससे पुराने भवन में जो जगह मिलेगी, उसे स्टोर सहित दूसरे काम के उपयोग में लिया जा सकता है। प्रबंधन को उम्मीद थी कि निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी द्वारा किसी भी सूरत में अप्रैल तक काम पूरा कर भवन हैंडओवर कर दिया जाएगा।

मेडिकल काॅलेज अस्पताल के विभिन्न निर्माण लेटलतीफी के कारण अधर में

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के भवनों ऐसे चल रहा निर्माण कार्य।

रेडियोलाजी के अलावा अलग-अलग बनने हैं दो लेक्चर हाल

अस्पताल में अभी एक्स-रे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन की जांच अलग-अलग होती है। तीनों विभाग तंग हाल कमरे में हैं। एमसीआई के नार्म्स के अनुसार नए ओटी के पास ही रेडियोलाजी डिपार्टमेंट के लिए भी भवन बन रहा है। इसमें एक्स रे, सीटी स्कैन व सोनोग्राफी की जांच की सुविधा मरीजों को एक ही छत के नीचे हो जाएगी। इसका काम भी अभी पूरा नहीं हो पाया है। भवन की छत तो ढल गई है लेकिन साफ-सफाई का काम अधूरा है।

अप्रैल में ही काम पूरा कर भवन करना था हैंडओवर

पीडब्ल्यूडी को अप्रैल में ही काम पूरा कर भवन हैंडओवर करना था। काम क्यों पूरा नहीं हुआ, इसके बारें में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ही ज्यादा अच्छे से बता सकते हैं। हमारे पास एमसीआई के नार्म्स के अनुसार अब जगह की कमी पड़ रही है। इससे कई प्रकार की समस्याएं भी हो रही हैं। -डाॅ. एके जायसवाल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, मेडिकल कालेज अस्पताल

एनएच के पुराने आॅफिस में मेडिसीन व आर्थो के लिए होगा ओपीडी

अस्पताल से लगे पुराने एनएच आफिस को प्रशासन द्वारा अधिग्रहित कर मेडिकल कालेज अस्पताल को दे दिया गया है। इसमें मेडिसीन व आर्थो विभाग के लिए नया ओपीडी बनना है। अभी मेडिसीन व आर्थो का मेडिसीन पुराने ओपीडी में लगता है। यह जगह दोनों विभागों की जरूरत के अनुसार काफी छोटी है। यहां प्रदर्शन रूम नहीं है। जबकि मेडिकल के छात्रों के लिए ओपीडी व वार्ड में प्रदर्शन रूम जरूरी होती है। दोनों विभागों के ओपीडी का निर्माण बेस तक ही हो पाया है।

इन्हीं कमियों से पिछले बार हुआ था जीरो इयर

मेडिकल कालेज की पिछले साल सत्र 17-18 में इन्हीं कमियों के कारण मान्यता नहीं मिली थी और कालेज जीरो इयर घोषित हो गया था। इसके बाद ही प्रशासन ने लगभग 3 करोड़ की राशि स्वीकृत कर निर्माण शुरू कराया। इसके बाद भी काम में तेजी नहीं थी। इस बार भी एमसीआई की टीम आई तो सारे निर्माण अधूरे थे। यहीं वजह है कि एमसीआई ने इस बार भी सत्र 18-19 की मान्यता देने से मना कर दिया था। आखिर में शासन स्तर पर पहल के बाद अंतिम समय में मान्यता मिली है। अब एमसीआई सत्र 19-20 की मान्यता के निरीक्षण पर अक्टूबर के बाद कभी भी यहां आ सकती है। यहीं हाल रहा तो फिर मान्यता हासिल करने में दिक्कत होगी।

नए ओटी में एक साथ चार आॅपरेशन टेबल की सुविधा

अस्पताल के लिए बन रहे नए ओटी में एक साथ चार आपरेशन टेबल लगाने की सुविधा है। पुराने ओटी में सिर्फ दो ही आपरेशन टेबल हैं। इसलिए यहां एक साथ दो ही डाक्टर आपरेशन कर पाते हैं जबकि अस्पताल में चार ओटी के लिए सारे संसाधन उपलब्ध हो गए हैं। पुराने ओटी में कई बार टेबल खाली नहीं होने से डाक्टरों को मरीज के आपेरशन के लिए समय बदलना पड़ता है।

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