पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • ग्लैंडर्स रोग से घाेड़े की माैत, जांच के लिए भेजे जा रहे पशु और मालिकों के सैंपल

ग्लैंडर्स रोग से घाेड़े की माैत, जांच के लिए भेजे जा रहे पशु और मालिकों के सैंपल

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
घोड़ों को ग्लैडंर्स नामक गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया है। इस बीमारी से एक घोडे़ की मौत भी हो गई है। घोड़ा मालिक अलताफ ने बताया 5 अप्रैल से वह घोडे़ का इलाज करवा रहा था,18 अप्रैल को घोड़े की मौत हो गई। स्थानीय डॉक्टरों का अमला बीमारी नहीं समझ पाया। 8 मई को प्रदेश की टीम ने घोड़े का ब्लड सैंपल लेकर हरियाणा के हिसार की लैब में भेजा गया। यहां से घोड़े की मौत ग्लैडंर्स बीमारी के कारण होने की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों ने बताया यह संक्रमण पशु पालकों को भी प्रभावित कर सकता है। अब पशु विभाग का अमला घोड़े और गधे और इनके मालिकों के ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए भेजने में जुटा हुआ है।

ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण

घोड़े और इसकी प्रजाति के पशुओं के नाक मुंह से लगातार पानी बहना, सांस लेने में दिक्कत होना, आंख और नाक से गंदा पानी बहने और शरीर में गांठ पड़ने जैसे लक्षण रोग ग्रस्त पशु में दिखाई देते हैं। इस रोग के संक्रमण से कम समय में ही पशु की मृत्य होने की संभावना बढ़ जाती है। इसका उपचार भी संभव नहीं है।

टॉस्क फोर्स की बैठक में जिले को संक्रमण से दूर रखने पर की चर्चा

बैतूल| ग्लैंडर्स रोग के संक्रमण से हुई पशु की मृत्यु को देखेते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। मंगलवार को जिला टास्क फोर्स की बैठक कलेक्टर शशांक मिश्र की उपस्थिति में हुई। बैठक में सीएमएचओ प्रदीप मोजेस ने बताया कि ग्लैंडर्स अश्वकुल के पशुओं (घोड़ा, गधा, खच्चर, टट्टू) में होने वाला रोग है। यह पशुओं से मनुष्यों में फैल सकता है। इसका बैक्टीरिया बर्कहोल्डेरिया मालेई मनुष्यों में गंभीर संक्रमण और रोग उत्पन्न कर सकता है। क्षेत्र में मनुष्यों में ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं। घोड़ों की देखभाल करने वाले, घोड़ा मालिक, तांगा चालक, संक्रमित पशुओं का उपचार करने वाले पशु चिकित्सक, चमड़ा निकालने वाले चर्मकार को बीमार पशु से संक्रमण का खतरा हो सकता है। विभाग ने पशु मालिकों से अपने पशुओं की जांच करवाने और उनके रखरखाव में सावधानियां बरतने को कहा है।

आमला। घोड़ों मे फैल रहा संक्रामक रोग।

ग्लैंडर्स बीमारी के कारण ही घोड़े की मौत की पुष्टि हुई है। पशु मालिकों, घोडों और गधों केे सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। घोड़े के इलाज में लिप्त रहने के कारण मैने स्वयं अपना ब्लड सैंपल भी जांच के लिए भेजा है। डॉ. मनोज चौहान, पशु चिकित्सा अधिकारी

टीम के साथ सर्वे कराया गया है। घोडे मालिकों को पूरी तरह एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मानव जीवन पर इस बीमारी का प्रभाव बहुत ही कम मात्रा में पड़ता है। डॉ. बीपी चौरिया, बीएमओ

संक्रमण के कारण और बचने के उपाय

लोकेलाईज्ड संक्रमण: घांव, खरोच, कट लगा होने से 1 से 5 दिन में संक्रमण हो सकता है। ऐसा होने पर पशुओं से दूर रहें।

पल्मोनरी संक्रमण- निमोनिया, पल्मोनरी एबसिसेस, प्लुरल इफ्युजन होने की स्थिति में फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है। बीमार होने पर पशुओं से दूर रहें। मास्क लगाकर काम करें।

ब्लड स्ट्रीम संक्रमण: ग्लैंडर्स का समय पर इलाज नहीं जाए तो 7 से 10 दिन में यह मृत्यु का कारण बन सकता है। इसलिए पशुओं में लक्षण दिखते ही चिकित्सक से जांच करवाएं।

क्रानिक संक्रमण: भुजाओं, पैंरों की मांसपेशियों और चमड़ी में गांठे हो जाती हैं। जो लंग्स, लीवर में फैल सकती हैं। ऐसा होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें और उपचार शुरू करें।

300 रुपए किलो से 143 ने खरीदे उत्तरप्रदेश से आए 1200 बकरे, संक्रमण से होने लगी मौत

मुलताई। बीमार बकरा-बकरी के उपचार के लिए लग रही भीड़।

भास्कर संवाददाता| मुलताई

एक सप्ताह पहले उत्तरप्रदेश से पिकअप में भरकर जमुनापारी, तोतापरी और अन्य प्रजातियों के बकरा-बकरी बिकने आए थे। 143 लोगों ने 300 रुपए प्रति किलो की दर से बकरा-बकरी खरीदे। जब इन्हें खरीदकर घर ले गए तो एक के बाद एक मरने लगे। पशु चिकित्सालय में जांच कराई तो पता चला बकरा-बकरी गोट फ्लेग से मर रहे हैं। बेरियर नाके पर एक सप्ताह पहले विक्रता पिकअप भरकर बकरे-बकरी बेचने लाया था। बेचने वालों ने बताया बकरे उत्तरप्रदेश से लाए हैं। 143 खरीददारों ने 300 रुपए प्रति किलो की दर से 12 सौ बकरे खरीदे। डेढ़ सौ से ज्यादा बकरा बकरी की मौत संक्रामक बीमारी के कारण हो चुकी है। कृषक फ्रेंडस क्लब के राजेंद्र भार्गव ने बकरा बकरी बेचने आए उत्तरप्रदेश के लोगों का पता लगाकर कार्रवाई कराने की मांग की है।

खरीददारों से लाखों की ठगी

बकरा-बकरी खरीदने वाले मुन्ना, इरशाद, रायल, वसीम, असलम ने बताया क्षेत्र में जमुनापारी प्रजाती बकरा बकरी नहीं मिलते हैं। बिकने आए बकरों का वजन 40 से 50 किलो का था। तीन सौ रुपए प्रति किलों के हिसाब से दाम सही लगने पर इन्हें खरीदा। बेचने वाले ने गुमराह कर बीमार बकरे थमा दिए है। संक्रमण से बकरा-बकरी की मौत हो रही है। व्यवसाय के लिए की गई खरीदी में लाखों रुपए की ठगी होने से व्यापारियों में आक्रोश है।

जांच के लिए भेजा सेंपल

पशु चिकित्सक डॉ. सीएस उबनारे ने बताया बकरा-बकरी के लक्षण गोट फ्लेग बीमारी के दिखाई दे रहे हैं। यह संक्रामक बीमारी है। बीमार बकरा बकरी की नाक का पानी और खून के सैंपल भोपाल प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही सही कारण पता चलेंगे। संक्रमण की रोकथाम कमे लिए टीके लगाए जा रहे हैं।

खबरें और भी हैं...