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पथरीली पहाड़ी पर वृक्ष गंगा अभियान से 1100 में से 950 पौधों को जिंदा बचाया

3 वर्ष पहले
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रामटेक की पहाड़ी के नाम से प्रसिद्ध हसलपुर की पहाड़ी पर अब पौधे लहलहा रहे हैं। भीषण गर्मी में भी ये पौधे गायत्री परिवार के सदस्यों के अथक प्रयासों और परिश्रम का परिणाम हैं। गायत्री परिवार अब इसे और व्यापक रूप देने की तैयारी में जुटा है। रामटेक की पहाड़ी को मॉडल बनाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

1100 में से 950 पौधे हरे

हसलपुर की रामटेक पहाड़ी की ऊंचाई डेढ़ सौ मीटर है। 6 एकड़ में फैली इस पहाड़ी के करीब 3 एकड़ क्षेत्र में गायत्री परिवार के सदस्यों ने फलदार पौधे रोपे थे। 2 जुलाई 2017 को रोपे गए 11 सौ पौधों में से 950 पौधे अब भी जीवित अवस्था में हैं। पहाड़ी पानी के संसाधन नहीं होने पर भी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में पौधों के संरक्षित होने से अन्य लोग यहां से प्रेरणा ले रहे हैं।

अामला पहाड़ी पर लगाए पौधे भीषण गर्मी में भी हरे-भरे हैं।

ऐसे तय हुई सुरक्षा

गायत्री प्रज्ञापीठ के एसपी डढोरे ने बताया कि 2 जुलाई 2017 को जिले के गायत्री परिवार के सदस्यों ने हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर पौधरोपण कर इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ली। पौधे की सुरक्षा करने सदस्यों ने 100-100 रुपए का अंशदान दिया। इस राशि से यहां पौध रक्षक नियुक्त किए गए। ट्री- गार्ड लगाकर टैंकर से पानी खरीदकर पौधों को पानी दिया गया। हसलपुर गांववासियों ने भी इस काम में सहयोग किया। पौधे बचाने के सामूहिक संकल्प से पहाड़ियों को हरा किया जा सका।

इन गांवों में भी लिया पौधे बचाने का संकल्प

हसलपुर की रामटेक पहाड़ी को हराभरा बनाने गायत्री परिवर के सदस्यों ने अब आसपास के गांव के लोगों को जोड़ना भी शुरू कर दिया है। नीलेश मालवीय अाैर ठाकुरदास पवार ने बताया कि छावल, ससुंद्रा, लालावाड़ी, बोरदेही क्षेत्र में पौधों को संरक्षित करने का संकल्प पूरा होने से आसपास के लोग भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं। प्रत्येक गांव में करीब 50 से ज्यादा पौधों को सुरक्षित करने ट्री गार्ड लगाए गए हैं।

अब यह करेंगे

प्रज्ञापीठ के देवकरण टिकारिया, केशोराव दवंडे, भरत धोटे ने बताया कि अभियान में आगे बचे हुए 3 एकड़ में और पौधे लगाए जाएंगे। श्रमदान से खंतिया खोदना, जनसहयोग से 10 हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी का निर्माण और गौ सेवा के लिए कार्यक्रम तैयार करना है।

150 मीटर ऊंची है पहाड़ी

08 माह पहले लगाए थे 11 सौ पौधे

950 पौधे आज है जिंदा हालत मे

03 एकड़ में किया था पौधरोपण

03 एकड़ में अब और है पौधरोपण प्रस्तावित

100 प्रति पौधे की जिम्मेदारी

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