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अंधारिया-नांदपुर में जलसंकट, सुधार करने रुचि नहीं ले रहे सरपंच, सचिव

3 वर्ष पहले
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गर्मी में अंधारिया और नांदपुर में जलसंकट बढ़ता जा रहा है। पंचायत के सरपंच और सचिव की लापरवाही के कारण किसानों को आस-पास के जलस्त्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बाद भी जलसंकट से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण 3 से 4 किमी दूर से पानी लाकर काम चला रहे हैं। पानी के लिए किसानों को कहीं रतजगा करना पड़ रहा है तो कहीं धूप में पसीना बहाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय और जिला प्रशासन ने समस्या के समाधान की मांग की लेकिन कोई हल नहीं निकला।

4 माह से लोग पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। 45 लाख की पेयजल योजना में 4 माह में 15 फीट कुआं खुद पाया है। अब काम बंद है। गांव के मनोज खाकर, अभिराम चौहान, गोवर्धन धाकड़, चितरंजन पटेल, अंछाराम झाड़े व अन्य लोग पीएचई जेई जेएन लालवानी से मिले। उन्होंने 2 दिन में इंतजाम का आश्वासन दिया। कलेक्टर शशांक मिश्र समस्या के समाधान के निर्देश दिए तो जेई ने 1 ट्यूबवेल में मोटर लगाकर पाइप खुला छोड़ दिया। ग्रामवासियों को पानी नहीं मिल सका है।

आमला. अंधारिया गांव के लोग पानी नहीं मिलने पर प्रदर्शन करते हुए।

जिन निजी जलस्त्रोतों में बेहतर पानी है, उसके अधिग्रहण की कार्रवाई प्रस्तावित कर पानी उपलब्ध करवाने का प्रयास करेंगे। पंच परमेश्वर योजना से जिस जलस्त्रोत में बेहतर पानी उपलब्ध है, वहां मोटर पंप से पानी उपलब्ध कराने के लिए 7 प्रतिशत तक राशि खर्च की जा सकती है। इसके लिए पीएचई विभाग से सहमति अनिवार्य है। अभी तक किसी भी सरपंच, सचिव ने ऐसा प्रस्ताव प्रस्तावित नहीं किया है। प्रवीण इवने, सीईओ, जनपद पंचायत

नांदपुर में 3 से 4 किमी दूर से ला रहे पानी

300 से ज्यादा घरों की बस्ती नांदपुर में आधा दर्जन हैंडपंप हैं। राहुल चौहान ने बताया सभी हेंडपंप तीन माह से बंद पड़े हैं। नल जल योजना बंद हुए 1 साल से ज्यादा समय बीत गया है। पंचायत के जिम्मेदार लोगों ने अभी तक पानी के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। गांव की बसाहट पहाड़ी पर है। ग्रामीणों को अब करीब 3-4 किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। यहां के लोग बैलगाड़ियों पर कोठियां रखकर और साइकिलों पर केन टांगकर पानी ला रहे हैं।

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