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मानवाधिकार कार्यकर्ता आसमां जहांगीर को भावभीनी श्रद्धांजलि

3 वर्ष पहले
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भारत-पाक के बीच भले ही सरहद की लकीरें खिंच गईं लेकिन लोगों के दिल आज भी खुले हैं। कमोबेश, वह लोग जो दोनों मुल्कों के बीच अमन-शांति के लिए काम करते हैं। ऐसी ही शख्सियत रहीं पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा वहां के सुप्रीमकोर्ट की वकील आसमां जहांगीर को विरसा विहार के मंच पर भावभीनी श्रद्धांजलि भेंट की गई और उनके संघर्षों पर आधारित किताब का भी विमोचन किया गया।

फोकलोर रिसर्च अकादमी, हिंद-पाक दोस्ती मंच, जमहूरी अधिकार सभा, विरसा विहार सोसायटी अमृतसर, पाकिस्तान इंडिया पीपल्स फोरम फार पीस एंड डेमोक्रेसी, माझा हाउस तथा नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल आर्गेनाइजेशन की संयुक्त पहल पर यह श्रद्धांजलि समागम आयोजित हुआ। इसमें मौजूद वक्ताओं ने दोनों मुल्कों के बीच दोस्ती के लिए उनके किए गए कामों को सराहा गया। अकादमी के प्रधान रमेश यादव ने कहा कि मुंबई के होटल ताज पर हुए आतंकी हमले के दौरान आसमां ने बड़ी निडरता से भारत और पाकिस्तान दोनों जगहों पर आतंकवाद की खिलाफत की थी।

विरसा विहार सोसायटी के प्रधान केवल धालीवाल ने कहा कि आसमां ने हमेशा ही अमन और दोस्ती की बात की तथा फिरकापरस्ती का विरोध किया। सुरजीत जज ने अपने कविता पाठ से उनको याद किया। इसी तरह से भारवी दिलीप कुमार, पुष्पेंद्रा कुलश्रेष्ठा, अमरजीत भल्ला, प्रो. कुलदीप सिंह डॉ. जसमीत नैय्यर, भुपिंदर सिंह संधू, सतनाम माणक ने भी उनके बारे अपने विचार रखे। इस मौके पर डॉ. चरणजीत सिंह नाभा, अरतिंदर संधू, कमल गिल, हरजीत सिंह, दिलबाग सिंह, सतीश झिंंगन, रंजीव शर्मा, गुरजिंदर सिंह बघियाड़ी, कर्मजीत जस्सल, अमरीक सिंह गिल, डॉ. शाम सुंदर दीप्ति आदि मौजूद थे।

मानवीय धर्म
भारतीय मंच पर पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए हुआ समागम
विरसा विहार में पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता आसमां जहांगीर के नामित रखे श्रद्धांजलि समागम के दौरान उन पर लिखी किताब का विमोचन किया गया।

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