पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अमृतसर की इकलौती लेडी ढोली बलजीत कौर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जितनी जिंदादिली से वह हंसती है और दूसरों को अपनी अोर आकर्षित करती है उतने ही जानदार तरीके से अमृतसर की बलजीत कौर ढोल की थाप पर दूसरों को नचाती हैं। जिद कब शौक और शौक कब जुनून और करिअर बन गया वह खुद नहीं जानती। बलजीत को खुद नहीं पता कि वह किस उम्र में ढोल बचाना सीख गईं, लेकिन जब से सीखा है तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बीबीके डीएवी काॅलेज से मास्टर इन परफॉर्मिंग आर्ट की डिग्री हासिल करने वाली बलजीत कौर गिद्दे की भी शान रह चुकी हैं। बलजीत 30 से ज्यादा लोक साज बजाना जानती हैं। इनमें शंख, ढोल, बीन, बुकचू, तुंबी, अलगोजे, मंजीरे, हंसरी, डफ, डारीयां, डफली, छज्ज, घड़ा, चिमटा, कैंची, घुंगरू, काटो, वंजली, बबीहा, नगाड़ा और क्लासिकल सितार शामिल है। बलजीत एक से डेढ़ मिनट कर शंख बजाकर सबको हैरानी में डाल देती हैं। 24 मई 1990 को जन्मी बलजीत के पिता का देहांत बहुत पहले हो चुका है और अब सिर्फ वह और उनकी मां ही हैं। बलजीत बटाला के ढोली सोनू व उस्ताद चुच माही से ढोल बजाना सीखा अौर फिर काॅलेज की गिद्दा टीम की अगवाई कर कई इनाम जीते। 2014 में कालेज खत्म कर बलजीत ने बैलेंसिंग अकेडमी खोली और बच्चों को पंजाबी संगीत से जोड़ रही हैं।

30 से ज्यादा लोक साज बजाना जानती हंै, बैलेंसिंग अकेडमी के जरिए बच्चों को विरासत से जोड़ रही

छोटी सी उम्र में उपलब्धियों की भरमार : बीए में गिद्दा मुकाबला में दूसरा इनाम, श्री करतारपुर साहिब गिद्दे में पहला इनाम, जीएनडीयू यूथ फेस्टिवल 2009 में फोक आर्केस्ट्रा में पहला स्थान, फोक आर्ट प्रदर्शनी 2009 में पहला इनाम, पंजाबी एकेडमी दिल्ली अंतर यूनिवर्सिटी सभ्याचार 2012-13 में दोनों बार पहला स्थान, दिल्ली इंटर यूनिवर्सिटी 2011-12 में उसने अपनी टीम सहित पेशकारी दी और दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य स्तरीय जोनल दिवस समागम चंडीगढ़ 2015 में पहला स्थान हासिल किया। नेशनल यूूथ फेस्टिवल उदयपुर में पहला स्थान व कला प्रदर्शनी 2014 में पहला स्थान हासिल किया। 2011 में उसे पीटीसी अवार्ड समागम में पेशकारी, डीडी पंजाबी में सावन उत्सव के दौरान 30,000 का इनाम, 2013 में ढोल बजाने पर बेस्ट परफॉर्मर सहित उदयपुर, बंगलुरू, चंडीगढ़ के नेशनल यूूथ फेस्टिवल में पंजाब को रिप्रजेंट कर चुकी हैं।

खबरें और भी हैं...