डीआईजी सुमेर सिंह के निधन से अमृतसर में भी शोक की लहर
बीएसएफ के पूर्व डीआईजी सुमेर सिंह तथा उनकी मां के मंगलवार को हुए सड़क हादसे में निधन से बीएसएफ अौर उनके परिवार में ही नहीं, बल्कि अमृतसर में शोक की लहर दौड़ गर्इ है। सुमेर सिंह मिलनसार व्यक्तित्व अमृतसर के लोगों को भी अाज उनके निधन से अाहत कर गया।
हरियाणा के एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए सुमेर सिंह ने करिअर की शुरुआात एक सिपाही से की थी। बचपन में शादी हो जाने के कारण उन्होंनें नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन देश भक्ति का जज्बा उन्हें फिर देश की सुरक्षा के लिए खींच लाया। बीएसएफ में बतौर इंस्पेक्टर भर्ती हुए सुमेर सिंह ने देश के विभिन्न इलाकों में अपनी ड्यूटी को पूरी तन्मयता से अंजाम दिया। इसी कड़ी के तहत पदोन्नत होते हुए वह अमृतसर सेक्टर के तहत अाते अटारी बॉर्डर पर बतौर कमांडेंट तैनात हुए थे।
3 साल तक पाकिस्तान से लगती इस सरहद पर देश की सुरक्षा में अहम योगदान देते हुए उन्होंने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भी कड़ी चुनौती दी थी। उनके दौर में तस्करी अौर घुसपैठ जैसी समस्याओं पर भी पाबंदी लग गर्इ थी। एक सिपाही होने के साथ-साथ वह मिलनसार और बहुमुखी प्रतिभा के भी धनी थे। यही कारण रहा है कि सरहद के बाशिंदों और किसानों में उन्होंने परिवार के सदस्य की तरह पैठ बनार्इ। सरहद के लोगों के विकास के लिए बहुत काम भी किया, अगर शहर में भी कोर्इ प्रोग्राम होता था तो लोग उनको बुलाना नहीं भूलते थे।
जाते-जाते उन्होंने ने भरोसा दिया था कि वह फिर आएंगे, कुछ समय बाद वह डीआईजी बनकर अाए भी थे। इसके बाद उनका यह से तबादला हो गया था। सेवानिवृति होने के बाद गत रक्षा बंधन के मौके पर वह पतंजलि यूनिवर्सिटी के बच्चों को लेकर बीएसएफ के जवानों को राखी बंधवाने अाए थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि हरियाणा उनकी जन्म भूमि है तो अमृतसर कर्मभूमि है, जिसे में कभी भी नहीं भुला पाएंगे।
डीआईजी के करीबी माने जाने वाले नाटककार गुरिंदर मकना कहते हैं कि सुमेर सिंह का जाना एक अपूर्णीय सत्य है। पंजाब नाटशाला के संस्थापक जतिंदर बराड़ अौर विरसा विहार के महासचिव रमेश यादव का कहना है कि डीआईजी सुमेर सिंह के निधन से पूरा पंजाब अमृतसर ही नहीं, बल्कि देश अाहत है।