महाराष्ट्र के अमरावती में महात्मा गांधी दिव्यांग केंद्र के संस्थापक तथा मानव और पर्यावरण प्रेमी शंकर बाबा पापड़कर भगत पूरन सिंह पिंगलवाड़ा विजिट के दौरान उस वक्त भावुक हो गए जब उनको यहां रखे गए भगत जी के रिक्शे को दिखाया गया।
यह वह रिक्शा है जिससे भगत जी अपने समय में मरीजों, अपंगों को उठा कर अपने आश्रम में सेवा के लिए लाया करते थे। पिंगलवाड़ा की मुखी डॉ. इंदरजीत कौर ने उनको बताया कि किस तरीके से विपरीत परिस्थितियों में भगत जी ने मानव सेवा की मशाल जलाए रखी।
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महाराष्ट्र के यह समाज व पर्यावरण प्रेमी 15 हजार पेड़ों तथा 123 विकलांग बच्चों की कर रहे हैं परवरिश
भगत पूरन सिंह का रिक्शा देखकर बाबा पापड़कर भावुक हो गए। डॉ. इंदरजीत कौर ने बताया कि किस तरीके से विपरीत परिस्थितियों में भगत जी ने मानव सेवा की मशाल जलाए रखी।
पिंगलवाड़ा संस्था पहुंच कर गदगद हुए बाबा
अमृतसर | महाराष्ट्र के अमरावती में महात्मा गांधी दिव्यांग केंद्र स्थापित करके 123 दिव्यांग व लावारिस बच्चों की परवरिस करने वाले तथा 15 हजार पेड़ लगा कर पर्यावरण में अहम योगदान देने वाले शंकर बाबा पापड़कर शनिवार को भगत पूरन सिंह पिंगलवाड़ा देखने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ नांदेड़ साहिब की नंदनवन संस्था के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
यहां पहुंचने पर पिंगलवाड़ा की मुखी डॉ. इंदरजीत कौर तथा प्रशासक दर्शन सिंह ने टीम का स्वागत किया। इसके बाद पिंगलवाड़ा की बस स्टैंड तथा मानांवाला शाखा का भी दौरा करवाया। इस दौरान बाबा जी और उनकी टीम यहां की सेवा भावना देख काफी प्रभावित हुई। बाबा जी का कहना है कि काफी समय से इस बारे सुनते आ रहे थे और जैसा सुना था उससे भी कहीं आगे पाया। बाबा जी का कहना है कि पिंगलवाड़ा मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हंै, दूसरों को भी इस तरह की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। नंदनवन संस्था से जुड़े एमएल जाधव, डॉ. सुनील कदम, मिसेज कदम, डॉ. हंसराज वैद, डॉ. लक्ष्मीकांत बजाज आदि मौजूद थे। इन लोगों का कहना है कि वे लोग अपने यहां भी पिंगलवाड़ा की तर्ज पर संस्था खोलना चाहते हैं। डॉ. इंदरजीत कौर का कहना है कि बाबा जी और उनकी टीम जो काम कर रही है वह सराहनीय है और पिंगलवाड़ा उन लोगों को हर तरह का सहयोग देने को तैयार है, ताकि यह लोग भी मानवता व पर्यावरण की बेहतर सेवा कर सकें।
पिंगलवाड़ा पहुंचे शंकर बाबा पापड़कर और नादेड़ साहिब के डॉक्टर। साथ हैं पिंगलवाड़ा की मुखी डॉ. इंदरजीत कौर तथा प्रशासक दर्शन सिंह।