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डॉक्टर ने इलाज से किया मना, गायनी वार्ड के बाहर पेट में मृत बच्चा लेकर तड़पती रही महिला

3 वर्ष पहले
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सांसद छापेमारी करवा करके कारगुजारी को जनता के सामने लाए या फिर सेहत मंत्री से फटकार पड़े, लेकिन गुरु नानक देव अस्पताल के डॉक्टरों पर इसका असर शायद ही पड़ता हो। मरीजों के इलाज को लेकर इन पर अक्सर उपेक्षा के आरोप लगते रहते हैं, लेकिन स्थिति “मगर हम नहीं सुधरेंगे...’ वाली ही बनी रहती है। शनिवार को भी अस्पताल से संबंधित गायनी वार्ड में एक गर्भवती महिला की स्थिति देख डॉक्टरों को जरा भी तरस नहीं आया और वह घंटों अस्पताल के बाहर तड़पती रही।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मूल निवासी छेदी लाल जो कि वर्तमान में प्रोफेसर कॉलोनी में रहता है, ने बताया कि वह अपनी गर्भवती प|ी राजकुमारी को लेकर यहां आया था लेकिन डॉक्टरों का बर्ताव सही नहीं था। उसका कहना है कि राजकुमारी का इलाज पहले रणजीत एवेन्यू के सेटेलाइट अस्पताल में चल रहा था। 16 मई को वहां के डॉक्टरों ने चैकअप किया तो पता चला कि गर्भ में बच्चे मूवमेंट कम हो गई है। सेटेलाइट अस्पताल से प|ी को यहां लेकर आया। यहां पर गायनी के डॉक्टरों ने जांच की और छह हजार रुपए की मांग की। पैसे बारे पूछने पर डॉक्टरों का कहना था कि यह पैसे दवा तथा सर्जिकल सामान पर खर्च होगा। वह दिहाड़ी करता है और पैसे देने में असमर्थता जताई तो इलाज करने से मना कर दिया गया और प|ी को लेकर वापस चला गया।

छेदी लाल ने बताया कि शनिवार को राजकुमारी की तबियत एकाएक खराब हो गई और फिर उसे लेकर अस्पताल आया। डॉक्टर के कहने पर अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि बच्चा पेट में ही मर चुका था। उसने जब मृत बच्चे को पेट से बाहर निकलने को कहा तो डॉक्टर ने फिर 5 हजार रुपए जमा करवाने को कहा। पैसा न देने की स्थिति में डॉक्टर ने कहा कि इलाज नहीं करेंगे, तुम इसे कहीं और ले जाओ। इसके वह मरीज को लेकर काफी समय तक गायनी वार्ड के बाहर बने फुटपाथ पर बैठ रहा।

जीएनडीएच के गायनी वार्ड पहुंची महिला राजकुमारी।

‘जांच शुरू करवा दी है’

जानकारी मिली तो मैने ट्रीटमेंट शुरू करवा दिया। फिलहाल इलाज में कहां कोताही हुई, जांच करवाई जाएगी और कार्रवाई भी होगी। डॉ. सुरिंदर पाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट

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