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अंगदान को प्रेरित करने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंची पीजीआई की टीम

3 वर्ष पहले
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खुद जिंदा रहना और अपनों को जिंदगी देना ही जिंदगी नहीं बल्कि औरों को भी आपकी जरूरत है। कमोबेश, अंगदान की बात करें तो इसके लिए बेशुमार लोग आप की मदद का रास्ता देख रहे हैं।

बिना किसी भेदभाव, लोभ-लालच और भय व भ्रम के इस तरफ कदम बढ़ाए, क्योंकि किसी का इस तरफ बढ़ाया गया एक कदम किसी की जिंदगी के साथ-साथ उसके परिवार का सहारा बन सकता है। अंगदान और देहदान के इसी पहलू को लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीजीआई चंडीगढ़ की तरफ से सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें गुरु नानक देव अस्पताल के डॉक्टरों ने भी हिस्सा लिया। सेहत एवं परिवार भलाई विभाग के तालमेल एवं मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा की अगुवाई में सेमिनार में पीजीआई के मेडिकल सुपरिटेंडेंट एवं मुख्य वक्ता डॉ. एके गुप्ता ने कहा कि अंगदान वर्तमान में समाज और देश के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि मरने के बाद इंसान के साथ सब कुछ खत्म हो जाता है लेकिन अंगदान करने एक आदमी कम से कम आठ लोगों को जिंदगी दे सकता है।

उनका कहना है कि देश में अंगदान के प्रति जागरूकता न होने के कारण हर साल अंगों के न मिलने से 5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। उनका कहना है कि इसके लिए अस्पतालों के स्टाफ व डॉक्टरों को ट्रेंड करने के साथ लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। डॉ. सुजाता शर्मा ने कहा कि वर्तमान में अंगदान सबसे बड़ा दान है क्योंकि किसी के द्वारा दान किया गया अंग किसी को जिंदगी दे सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोगों को जागरूक किया जाए।

पीजीआई के ही डॉ. आशीश शर्मा ने कहा कि पीजीआई ने 1996 से लेकर अब तक इस दिशा में अहम काम किया है और दूसरों को भी इस तरफ प्रेरित तथा उत्साहित करने का सिलसिला जारी है। नेत्र विभाग के डॉ. कर्मजीत सिंह ने अंगदान के तथा महत्ता पर रोशनी डाली। डॉ. सुदर्शन कपूर ने आए हुए डॉक्टरों का धन्यवाद किया।

पीजीआई, कॉलेज और गुरु नानक देव अस्पताल के डॉक्टरों ने बताई अंगदान की महत्ता, अंगदान करने से एक व्यक्ति आठ लोगों की जान बचा सकता है

सरकारी मेडिकल कॉलेज में अंगदान सेमिनार के मौके पर ज्योति जलाते डॉक्टर्स।

अंगदान रिश्तेदारों को ज्यादा

पूरे देश में ज्यादातर अंगदान अपने परिजनों के बीच में ही होता है अर्थात कोई व्यक्ति सिर्फ अपने रिश्तेदारों को ही अंगदान करता है। विभिन्न अस्पतालों में सालाना सिर्फ अपने मरीजों के लिए उनके रिश्तेदारों के द्वारा लगभग 4,000 किडनी और 500 कलेजा दान किया जाता है।

इन अंगों का दोबारा इस्तेमाल

डॉक्टरों के मुताबिक इंसान की मौत के बाद भी किडनी, फेफड़ा, हृदय, आंख, कलेजा, पाचक ग्रंथि, आंख की पुतली की रक्षा करने वाला सफेद सख्त भाग, आंत, त्वचा ऊतक, अस्थि ऊतक, हृदय छिद्र तथा नसें दूसरे के काम आ सकती हैं।

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