पिछले साल सब्जियों व दलहन में नुकसान होने के कारण किसान फिर से धान और गेहूं की तरफ मुड़ा है। इस बार की गेहूं की उपड़ में हुए इजाफा ने स्पष्ट किया है कि मंडीकरण तथा सांभ-संभाल आसान होने के कारण किसान ने फसली चक्र को ही तवज्जो दी है। डीसी कमलदीप सिंह संघा ने बताया कि जिले में इस बार गेहूं की खरीद का काम मुकम्मल हो चुकी है। इसकी लिफ्टिंग भी तकरीबन हो चुकी है। उनका कहना है कि इस साल जिले में आज तक मंडियों में 681857 मीट्रिक टन गेहूं की आमद हो चुकी है। उनका कहना है कि इस बार पिछले साल के मुकाबले मंडियों में 51000 मीट्रिक टन का इजाफा हुआ है। डीसी ने बताया कि यह उपज बढ़ने नहीं बल्कि रकबा बढ़ने के कारण हुआ है। इसका मुख्य कारण मटर, आलू, मूंग और मक्की वाले किसानों ने गेहूं को तवज्जो दी है। उनका कहना है कि जंडियाला, मजीठा आदि में सब्जी वाले रकबे में गेहूं की बिजाई की गई।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि धान की लगाई 20 जून से पहले न करें, ताकि गिरते भूजल स्तर को संभाला जा सके। किसान नाड़ को जलाने की बजाय उसे खेत में ही मिला दें, जो जैविक खाद का काम करेगी।