12वीं के खराब रिजल्ट के बाद शिक्षा विभाग जल्द ही कम गिनती के स्कूलों को मिडिल स्टैंडर्ड में बदलने की तैयारी पर है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अफसरों से ऐसे स्कूलों की लिस्ट मांगी है, जिनकी गिनती 15 से कम है। पिछले कुछ समय में विभाग ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनमें मंडल कार्यालय और क्लस्टर खत्म करना भी अहम है। विभाग ने सोमवार सभी शिक्षा अधिकारियों को खत लिखे हैं। इन पत्रों का विषय है -‘राज्य के 15 से कम स्टूडेंट्स वाले सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूलों को बंद कर मिडिल स्कूल बनाने संबंधी’। इसके तहत सभी जिलों को ऐसे स्कूलों की लिस्ट बनाकर डायरेक्टर ऑफिस की ईमेल पर भेजने को कहा है।
शिक्षा विभाग राजनीति
से ऊपर उठे : डीटीएफ
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला प्रधान अश्वनी अवस्थी ने कहा कि शिक्षा विभाग को राजनीति से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। पहले राजनीतिक दबाव में आकर स्कूलों को अपग्रेड कर दिया जाता है। फिर बाद में उन्हें दोबारा मिडल स्कूलों में बदलने की आवश्यकता होती है। शिक्षा विभाग को पहले ही सर्वे करवाना चाहिए कि गांव या आसपास के गांवों में इतने स्टूडेंट्स हैं कि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को वहां चलाया जा सकता है। राजनीतिक दबाव में बनाए गए इन स्कूलों में स्टाफ भी दिक्कत झेलता है और आम आदमी के टैक्स से कटा पैसा भी व्यर्थ जाता है।