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मथुरा-वृंदावन की चित्रकारी को तंजौर के हुनर से सजा रहे मोहन

3 वर्ष पहले
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सबसे बड़ा कलाकार दुनिया को बनाने वाला भगवान है, लेकिन इंसान उसी भगवान को भी अपनी कला में रंग लेता है। कमोबेश मूर्तिकारी, पेंटिंग और चित्रकारी जैसी विधाएं इसी का नमूना हैं। अमृतसर में भी एक ऐसे अनूठे शख्स हैं जो मथुरा-वृंदावन और बरसाने के मंदिरों में लगे सदियों पुराने चित्रों को तंजौर की कला से सजा रहे हैं। ये हैं कश्मीर एवेन्यू में रहने वाले मोहन मेहता।

बचपन से कला में रुचि रखने वाले मेहता डीएवी आईटीआई कॉलेज में 36 साल बतौर एप्रेंटरशिप एडवाइजर नौकरी करने के बाद 2004 में रिटायर हुए। कश्मीर एवेन्यू में रहने वाले मेहता के मुताबिक, 6 साल पहले उनका राधा-कृष्ण की नगरी कहे जाने वाले मथुरा-वृंदावन और बरसाना आना-जाना शुरू हुआ। वह हर महीने पूर्णमासी को दर्शन करने जाते। एक दिन बरसाना के मंदिर में माथा टेकने गए तो वहां राधाजी का 400 साल पुराना चित्र देखकर उसे पंडितों से मांग बैठे। पंडितों ने इनकार करते हुए कहा कि उन्हें स्वयं राधाजी से ही ये चित्र मांगना चाहिए। बकौल मेहता, वह उसी समय राधाजी के चित्र के सामने बैठ गए और उसे घर ले जाने की जिद करने लगे। उनका हठ देखकर अंतत: पंडितों ने उन्हें वह चित्र दे दिया। अमृतसर लौटने के बाद उन्होंने उसकी दो कॉपी करवाई और तंजौर के हुनर से निखार दिया। इसमें से एक चित्र उन्होंने अपने घर में लगा लिया और दूसरा बरसाना के मंदिर में भेज दिया। वहां के पंडित उसे देखकर दंग रह गए और तुरंत राधा रानी जी की 8 सखियों के चित्र सजाने की सेवा दे दी। ये सभी चित्र तैयार हो चुके हैं।

अनूठा प्रयास
राधा रानी की 8 सखियों को ऐसे सजाया कि हैरान रह जाते हैं देखने वाले, डीएवी आईटीआई कॉलेज में एप्रेंटरशिप एडवाइजर रहे हैं मेहता
कोई मेहनताना नहीं लेते
मोहन मेहता के मुताबिक, उन्होंने पहली बार जब पंडित जी से राधाजी का चित्र मांगा था, उस समय उन्हें कोई ज्ञान नहीं था लेकिन आज वह चित्रों को इस तरह सजा देते हैं कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं। पुराने चित्रों को सजाने में लगने वाले सितारे, मोती और दूसरा सारा सामान वह खुद बाजार जाकर खरीदते हैं और कोई मेहनताना नहीं लेते।

वृंदावन में होने वाली आरती को भी सजाया
मेहता के मुताबिक पंडितों ने वृंदावन के मंदिरों में बांके बिहारी की सुबह-शाम होने वाली आरती की सजावट की जिम्मेदारी भी उन्हें दी है। वह अपने हाथ से लिखने के बाद आरती को अगले सप्ताह बांके बिहारी मंदिर में लगाएंगे। उनकी इच्छा अब दुर्ग्याणा तीर्थ के विग्रहों को सजाने की है।

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