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अभी और भी मेहनत करनी है..

3 वर्ष पहले
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नवजीत कौर जब अपनी घर पहुंची तो उसकी मां और रिश्तेदारों को नाचते हुए देख वह खुद को भंगड़ा डालने से रोक नहीं सकी। फोटो | संजय वालिया

अभी और भी मेहनत करनी है। अभी तो केवल कांस्य पदक लेकर आई हूं, मगर मेरा सपना है कि देश के लिए गोल्ड जीतूं और देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करूं। मेरा अगला लक्ष्य ओलंपिक गेम्स हंै, जिनकी तैयारी मैं कल से ही शुरू कर दूंगी। -नवजीत कौर ढिल्लों

कॉमनवेल्थ की कांस्य पदक विजेता नवजीत का फीका स्वागत, प्रशासनिक अफसर पहुंचे ही नहीं

भास्कर न्यूज | अमृतसर

ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ गेम्स में डिस्कस थ्रो में ब्राउंज मेडल जीतने वाली अमृतसर नवजीत कौर बुधवार सुबह 6 एयरपोर्ट पहुंची, लेकिन जिन प्रशासनिक अफसरों को उसका गर्मजोशी से स्वागत करना चाहिए था वे पहुंचे ही नहीं। यहीं नहीं किसी नेता ने भी एयरपोर्ट पर पहंुचकर उसका स्वागत करने की जहमत नहीं उठाई। एयरपाेर्ट पर नवजीत का घरवालों और स्पोर्ट्स डिपोर्टमेंट के अफसरों ने स्वागत किया। एक तरफ पंजाब सरकार युवा पीढ़ी को नशा छोड़ कर खेलों की तरफ प्रोत्साहित करने की बातें कर रही है और दूसरी तरफ खुद प्रशासन ही इंटरनेशनल स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को अनदेखा करता है। नवजीत ने आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्टा में आयोजित हुई कामनवेल्थ गेम्स डिस्कस थ्रो इवेंट में 57.43 मीटर थ्रो करते हुए कांस्य पदक हासिल किया है, मगर प्रशासनिक अधिकारियों को शायद इस बात से कुछ भी मतलब नहीं है। नवजीत की इस जीत ने न केवल उसके माता-पिता बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।

घरवाले ढोल-नगाड़ों के साथ घर तक ले गए

परिवार वालों के अलावा श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट, जीएनडीयू के स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों सहित कई खिलाड़ी व कोच नवजीत के स्वागत के लिए पहुंचे। उसे डोल-नगाड़ों के साथ उसे घर तक लाया गया, मगर प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी नवजीत कौर को रिसीव व स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट पर नहीं पहुंचा।

दरबार साहिब में जाकर वाहेगुरु का शुक्रिया किया

वहीं बुधवार सुबह अमृतसर पहुंचने पर नवनीत कौर सबसे पहले श्री हरिमंदिर साहिब में वाहेगुरु का शुक्रिया अदा करने के लिए पहुंची और अरदास की। इसके बाद उन्होंने बात करते हुए कहा कि अब साल-2020 में होने वाली वर्ल्ड ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल करके देश का नाम रोशन करना है, जिसके लिए आने वाले दिनों में कठिन परिश्रम से अभ्यास जारी रखूंगी।

नवजीत का पूरा परिवार खेलों को समर्पित है

माता कुलदीप कौर ढिल्लो हॉकी में इंटरनेशनल स्तर के खिलाड़ी रह चुकी हैं, जबकि पिता जसपाल सिंह ढिल्लों नेशनल खेलों में गोल्ड और सेप खेलों में सिल्वर मेडल हासिल कर चुके हैं। इसी तरह भाई जसदीप सिंह ढिल्लों यूथ नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं। नवजीत खेलों में अपने पिता जसपाल सिंह प्रेरित है और जब वह छठी कक्षा में थी तो उसके पिता ही सबसे पहले कोच थे।

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