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देसी टोटका...जीएनडीएच में कुत्ते भगाने के लिए मुलाजिमों ने टांगी नील से भरी बोतलें

3 वर्ष पहले
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सबसे बड़े अस्पताल में जमे रहते हैं कुत्ते...अमृतसर जिले के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल, गुरुनानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) के सफाई मुलाजिमों ने यहां के वार्डों में जमे रहने वाले आवारा कुत्तों से निपटने के लिए देसी टोटके का सहारा लिया है। उन्होंने ओपीडी की ऊपरी मंजिल, गायनी और दूसरे वार्डों में दोनों तरफ नील से भरी 50-50 बोतलें टांग दी हैं। मुलाजिमों का दावा है कि जिन-जिन वार्डों के गलियारों में ये बोतलें टांगी गई हैं, कुत्ते वहां नहीं जा रहे। गुरुनानक देव अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में जमे रहने वाले पांच दर्जन से ज्यादा कुत्तों से मुलाजिमों के साथ-साथ यहां आने वाले मरीज और उनके तिमारदार भी परेशान रहते हैं।

मुलाजिमों की 300 में से 190 पोस्ट खाली...जीएनडीएच के सफाई मुलाजिमों को ये आइिडया तब आया जब पिछले दिनों शहर के कई इलाकों में कुत्तों से परेशान लोगों द्वारा घरों के बाहर ऐसी बोतलें टांगने की खबरें फैलीं। जीएनडीएच में सफाई मुलाजिमों के 300 पद हैं जिनमें से 190 खाली पड़े हैं। नए ब्लॉक बन जाने से 250 मुलाजिम और चाहिए। मुलाजिमों के अनुसार, इतने बड़े अस्पताल कैंपस को साफ रख पाना खासा चुनौतीभरा काम है। ऊपर से ये कुत्ते हमेशा गंदगी फैलाते रहते हैं। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुरिंदर पाल भी कहते हैं कि अस्पताल में कुत्तों की समस्या बहुत ज्यादा है।

क्या कहती है साइंस

नील की महक से भागते हैं कुत्ते : सतबीर सिंह

वेटरनरी डॉक्टर सतबीर सिंह कहते हैं कि कुत्तों की सूंघने की ताकत तेज होती है और उन्हें नील की महक पसंद नहीं होती। इसलिए वह उससे दूर भागते हैं। गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) में रिसर्च कर रहे संजीव कुमार कहते हैं कि कुत्ते नीले रंग से डरते भी हैं।

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