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दो तहसीलों के बीच चक्कर काट रहे रजिस्ट्रियां करने वाले सब-रजिस्ट्रार

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार ने तहसीलों में लोगों के चक्कर खत्म करने के लिए 18 दिन पहले सब-रजिस्ट्रार की नई पोस्ट बनाई गई है, लेकिन इसके बावजूद लोगाें को काम करवाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं चक्करों में तो सब-रजिस्ट्रार भी पड़ गए हैं, क्योंकि उन्हें जायदाद से संबंधित दस्तावेजों को रजिस्टर्ड करने के लिए एक तहसील से उठकर दूसरी तहसील में हर घंटे जाना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से अमृतसर तहसील-1 और तहसील -2 में कुछ ऐसा ही आलम है। यहां सब रजिस्ट्रार की ड्यूटी निभा रहे अधिकारी एमएस सिद्धू सुबह 9 से 3 बजे तक लोगों के दस्तावेज रजिस्टर्ड करते हैं। एक तहसील में एक घंटे तक काम निपटाने के बाद वह दूसरी तहसील में बैठे लोगों का काम निपटने में लग जाते हैं और यह सिलसिला 3 बजे तक इसी तरह जारी रहता है।

काम जल्द कराने के लिए सब-रजिस्ट्रार की नई पोस्ट बनाई, फिर भी लोगों को करना पड़ रहा इंतजार, एक ही अफसर कभी तहसील-1 तो कभी तहसील-2 में निपटा रहा काम

18 दिन पहले राज्य सरकार ने बनाई थी नई पोस्ट

इसी महीने के शुरुअात में राज्य सरकार ने सब-रजिस्ट्रार की नई पोस्ट बनाई है। इससे पहले तहसीलदार ही यह सारा काम देखते थे, लेकिन इसी महीने प्रदेश सरकार के वित्त कमिश्नर रेवेन्यू की ओर से जारी आदेश के बाद तहसीलदार सिर्फ कोर्ट वर्क, इंतकाल, मैरिज रजिस्ट्रेशन, तकसीम के केस, गिरदावरी, निशानदेही आदि के काम के अलावा ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर काम कर रहे हैं, जबकि सब-रजिस्ट्रार तहसील में बैठकर सिर्फ दस्तावेजों की रजिस्ट्रेशन का काम निपटा रहे हैं।

पहले चक्कर लगाने पड़ते थे अब इंतजार करना पड़ रहा

नई पोस्ट के बाद सब रजिस्ट्रार का काम पहले से बढ़ गया है। उन्हें दोनों तहसीलों में जाकर काम निपटाना पड़ रहा है, लेकिन इस नई तबदीली से दस्तावेज रजिस्टर्ड करवाने तहसील में पहुंचने वाले लोगों को चक्कर तो नहीं लगाने पड़ रहे, लेकिन इंतजार जरूर करना पड़ रहा है।

नई व्यवस्था से पहले सीटों पर कम मिलते थे तहसीलदार : इससे पहले तहसील में दस्तावेज रजिस्टर्ड करने की पावर तहसीलदार के पास था। तहसील-1 और तहसील-2 में अलग-अलग तहसीलदार बैठते थे। तहसीलदार के अपने कमरे में बैठने का समय सुबह 9 से 3 बजे तक होता था। इसके बाद 3 से 4 बजे तक का समय डाक साइन करने के लिए रखा जाता था जबकि 4 से 5 बजे जायदाद संबंधित डाक्यूमेंट्स संबंधित व्यक्ति को डिलिवर किये जाते थे। आम तौर पर तहसीलदार करीब 11 या 12 बजे अपनी सीट पर बैठते थे और दोपहर 3 बजे तक काम चलता था। कई बार तहसीलदार को वीआईपी ड्यूटी के संबंध में कही जाना पड़ता था। इस दौरान तहसील में दस्तावेज रजिस्टर्ड करने का काम उतनी देर तक रुका रहता था। तहसीलदार के सीट पर न होने के कारण कई-कई चक्कर लगाने पड़ते थे।

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