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मरी मछलियों को डिस्पोज ऑफ करने का जिम्मा किसका...3 विभाग एक-दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा, मार्केट में बेचने के लिए उठा रहे ठेकेदार

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | तरनतारन/ हरिके पत्तन/रईया

कीड़ी अफगान स्थित चड्ढा शुगर इंडस्ट्रीज से लीक होकर ब्यास दरिया में मिले शीरा का असर शुक्रवार को हरिके हैडवर्क्स तक देखने को मिला। हरिके बैराज में पानी का रंग गहरा भूरा है और उसमें मरी हुई मछलियां तैरती साफ देखी जा सकती हैं। शीरा का असर खत्म करने के लिए पौंग डैम से छोड़ा गया पानी शनिवार दोपहर बाद ही हरिके पहुंच पाएगा। शुक्रवार सुबह ये पानी अमृतसर-जालंधर हाईवे पर ब्यास पुल तक पहुंच गया जिसके बाद यहां शीरा का प्रभाव कुछ कम नजर आया।

दरिया में शीरा के रिसाव से हुए नुकसान को कम करने के लिए पौंग डैम से ज्यादा पानी छोड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। हैरानी वाली बात ये है कि मरने वाली मछलियों को डिस्पोज ऑफ कैसे किया जाना है, इसे लेकर जिला प्रशासन या दूसरे सरकारी महकमे की ओर से कुछ नहीं सोचा गया। तरनतारन जिले में कुछ ठेकेदार ये मछलियां बाजार में बेच रहे हैं जिन्हें रोकने की जिम्मेदारी तीन महकमे एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। हरिके से शीरा वाला पानी फिरोजपुर और राजस्थान फीडर में डाला जा रहा है। इससे दोनों नहरों के 3 किलोमीटर के दायरे में पानी की बदबू से दम घुटने की शिकायतें आ रही हैं।

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