मंडी में टमाटरों का कोई खरीदार नहीं मिलने के कारण इसे यूं ही जमीन पर गायों के आगे डाल दिया गया। गाएं भी टमाटर खाने लगीं।
300 टन पैदावार बढ़ी, पहले 200 टन आवक थी, इस बार बढ़कर 500 टन हो गई
फ्रूट एंड वेजिटेबल मर्चेंट्स यूनियन के प्रधान रविंदर सेखों तथा महासचिव सुरिंदर बिंद्रा ने बताया कि गत सालों में मार खाए किसानों ने इस बार टमाटर की बिजाई ज्यादा की है। इस दौरान उन्होंने बताया कि पहले रोजाना 200 टन की आवक थी जो इस बार बढ़ कर 500 टन हो गई है। इसलिए टमाटर की यह नौबत आई है।
रोजाना 100 टन की खपत
यूनियन नेताओं ने बताया कि अमृतसर में सीजन में रोजाना 100 टन टमाटर की खपत होती है। बाकी की उत्तर प्रदेश, राजस्थान के अलावा पाकिस्तान सप्लाई होता रहा है। पाकिस्तान तो 70 फीसदी निर्यात कर दिया जाता था। इस बार उक्त दोनों राज्यों में फसल पहले तैयार हो गई है और पाकिस्तान की सप्लाई पूरी तरह से बंद है। इस कारण इसे औने-पौने दामों में बेचा जा रहा है।
सिर्फ तुड़ाई-ढुलाई का खर्च 60 रुपए
यूनियन के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट जसपाल सिंह सेठी, अमरदीप सिंह चतरथ, मोहित अरोड़ा तथा किसान बलविंदर सिंह, संतोख सिंह, निर्मल सिंह ने बताया कि एक क्रेट टमाटर (20 किलो) की खेतों से तुड़ाई, क्रेट की कीमत, ढुलाई आदि का खर्च किसान को 60 रुपए तक पड़ रही है। ऐसे में किसान जो मंडी में लेकर आ रहा है उसे वहीं फैंक रहा है और जो खेतोें में पड़ा है उसे वहीं पर डंप करने को मजबूर है।
मंडी में 50 पैसे, शहर में 10 रु. पाक में 200 रु. किलो
पाकिस्तान के निर्यातक गौरव कोहली ने बताया कि जो टमाटर मंडी में 50 पैसे में नहीं बिक रहा है वही शहर में आकर 10 रुपए तक बिक रहा है। उन्होंने बताया कि 30 किमी की दूरी पर पाकिस्तान में यही टमाटर 200 रुपए किलो बिक रहा है। उनका कहना है कि सरकार को चाहिए कि निर्यात फिर से खोले, ताकि अपने किसान को बचाया जा सके।