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‘ईच वन-टीच वन’ का टारगेट लेकर 8 साल से जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे रिटायर्ड कर्नल, टीचर, बिजनेसमैन

3 वर्ष पहले
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मेहनत उनका कर्म है और शिक्षा की अलख जगाना मकसद। इसी क्रम में ‘ईच वन-टीच वन’ के उद्देश्य के साथ ई-ऐकडेमिक्स सोसायटी आठ साल से जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही है। शहर के एसजी एन्क्लेव फेज-वन और ऋषि विहार में खोले गए सोसायटी के दो स्कूलों में रिटायर्ड इंजीनियर, बुद्धिजीवी, टीचर और बिजनेसमैन बच्चों को पढ़ाते हैं। इन स्कूलों में आम पढ़ाई के साथ-साथ कंपीटीशन की तैयारी भी मुफ्त कराई जाती है। दोनों जगह सुबह 9 से शाम 6 बजे तक पढ़ाई होती है।

एसजी एन्क्लेव और ऋषि विहार में दो स्कूल, 6वीं से कंपीटीशन तक की तैयारी

बठिंडा में रहते हुए 2010 में आर्मी से रिटायरमेंट के बाद कर्नल अरविंद ठाकुर ने समाज के लिए कुछ करने की ठानी। मूल रूप से बिहार के रहने वाले ठाकुर ने अमृतसर के एसजी एन्क्लेव फेज-वन में 200 गज में कोठी बनाने के बाद उसी की बेसमेंट में सात बच्चों से शुरुआत की। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। आज उनके पास 50 से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। वह छठी क्लास से लेकर इंजीनियरिंग और दूसरे कंपीटीशन टेस्ट की तैयारी भी करवाते हैं।

750 रुपए में आईलेट्स की तैयारी...रिटायर्ड कर्नल अरविंद ठाकुर बताते हैं कि बीते 8 बरसों में उनकी सोसायटी ने सैकड़ों बच्चों को कंपीटीशन की तैयारी करवाई। इनमें से कई आज अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छे पदों पर है। यहां मात्र 750 रुपए एडमिन फीस लेकर आइलेट्स की तैयारी भी कराई जाती है। यहां के कई बच्चे विदेश में सैटल हो चुके हैं।

संसाधनों की कमी के कारण कहीं कोई बचपन अनपढ़ न रह जाए, इसके लिए 2 सोसायटी अमृतसर में चला रही 3 स्कूल

कर्नल अरविंद ठाकुर बताते हैं कि वे खुद बच्चों को पढ़ाते हैं। उनके यहां पढ़ने वाले जो बच्चे आज कुछ बन चुके हैं, वे भी समय निकालकर दूसरे स्टूडेंटस को पढ़ाने आते हैं। इससे एक चेन बन जाती है। रिटायर्ड इंजीनियर, बुद्धिजीवी, टीचर और बिजनेसमैन भी यहां फ्री पढ़ाते हैं।

सोसायटी के 37 सक्रिय मेंबर : शिक्षा के प्रसार के लिए बनाइ्र गई ई-ऐकडेमिक्स सोसायटी के 37 सक्रिय मेंबर हैं। सोसायटी के सारे फैसले सात सदस्यीय कार्यकारिणी लेती है। यहां एक ही बात सुनिश्चित की जाती है कि हर जरूरतमंद बच्चे तक मदद पहुंचे। सोसयटी ने फेसबुक पर ई-ऐकडेमिक्स सोसायटी नाम से पेज भी बना रखा है जहां सारी जानकारी दी जाती है।

गरीब बच्चों को 13 साल से फ्री एजुकेशन और वोकेशनल ट्रेनिंग, हर बच्चे को 150 रुपए की मंथली स्कॉलरशिप भी

भास्कर न्यूज | अमृतसर

जिंदगी में कॅरिअर गाइडेंस की कमी रही। पढ़ाई में तेज थे मगर संसाधनों की कमी के कारण बहुत सी इच्छाएं मन में दबी रह गईं। दिल के किसी कोने में ख्वाहिश थी कि कुछ करना है समाज के उन बच्चों के लिए जो संसाधनों की कमी के कारण पढ़ नहीं पाते।

इसी सोच के साथ प्रोफेसर डाॅ. जोगिंदर सिंह अरोड़ा ने 1991 में मिशनरी एजुकेशनल सोसायटी की नींव रखी। सोसायटी के फाउंडर प्रेजीडेंट प्रो. अरोड़ा खालसा काॅलेज में काॅमर्स के स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं। 27 साल पहले 5 मेंबरों के साथ घर के दो कमरों से शुरुआत करने वाले प्रो. अरोड़ा की सोसायटी में आज 31 सक्रिय मैंबर हैं। इनमें से 24 पंजाब और 7 विदेश में है।

1991 में 5 मेंबरों से शुरू हुई मिशनरी सोसायटी के आज 31 सदस्य

सोसायटी ने गरीब बच्चों को पढ़ाई के प्रति अवेयर करने के लिए वर्ष 2005 में तरनतारन रोड पर स्कूल खोला। आज इस स्कूल में 9 कमरे हैं, जहां 5 साल से लेकर 12 साल तक के बच्चों को 5वीं तक की पढ़ाई मुफ्त कराई जाती है। बच्चों की सुविधा के लिए स्कूल का समय दोपहर 1 बजे से शाम 5.30 बजे तक रखा गया है। इस स्कूल में 50 बच्चों को तीन टीचर पढ़ाते हैं। इस सोसायटी के मेंबरों में प्रोफेसर, बिजनेसमैन, एडवोकेट और इंडस्ट्रियलिस्ट शामिल हैं।

रोज बदलता है लंच का मेन्यू...स्कूल में दोपहर के समय बच्चों को मुफ्त खाना भी दिया जाता है। इसमें दाल-चपाती, सब्जी, चावल और मीठा शामिल रहता है। खाने का मैन्यू रोज बदला जाता है। बच्चों को हर महीने 150 रुपए की स्कॉलरशिप भी दी जाती है ताकि पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें जेब खर्च की कमी महसूस न हो।

नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट के तहत चलाए जा रहे स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ मुफ्त वोकेशनल ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसके लिए अलग से दो टीचर हैं। यहां बच्चों को सिलाई-कढ़ाई-बुनाई और मोमबत्ती व आचार बनाना सिखाया जाता हैं।

लिटरेसी-डे पर सालाना सेमिनार...मिशनरी एजुकेशनल सोसायटी हर साल इंटरनेशनल लिटरेसी-डे पर सेमिनार करवाती है जिसमें राज्यभर से एक हजार बच्चे भाग लेते हैं। सोसायटी इनमें से प्रतिभाशाली बच्चो को सम्मानित भी करती है। इसके अलावा सोसायटी के मेंबर अलग-अलग स्कूलों-कॉलेजों में कॅरिअर गाइडेंस पर लेक्चर भी देते हैं।

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