अमृतसर नगर निगम के कर्ताधर्ताओं को सिर्फ खास लोगों की चिंता है। आम आदमी मर भी जाए तो परवाह नहीं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये कि दुर्ग्याणा मंदिर में 9 मई को लोकल बॉडीज मिनिस्टर नवजोत सिद्धू पर हमला करने वाले सांड को नगर निगम ने अगले ही दिन पकड़कर गौशाला में बंद कर दिया मगर परवीन मेहरा की जान लेने वाला सांड रविवार को भी बगीची शोभाराम की गलियों में घूमता रहा। परवीन मेहरा के भाई अश्विनी मेहरा ने कहा कि आवारा पशुओं के बढ़ते आतंक के कारण दुर्ग्याणा तीर्थ के आसपास रहने वाले लोग डरे हुए हैं।
जिस सांड ने बुजुर्ग को पटक कर मार डाला वहा रविवार रात भी लोहगढ़ में आवारा घूमता मिला।
निगम का बहाना... : गांववाले छोड़ जाते हैं सांड, ठठियां गौशाला का केस कोर्ट में : बब्बर
शहर में आवारा पशुओं के आतंक को लेकर निगम के अपने ही तर्क और बहाने हैं। निगम के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर जेपी बब्बर कहते हैं कि आसपास के गांववाले शहर में सांड छोड़ जाते हैं। ठठियां गांव में बनने वाली गौशाला का केस कोर्ट में होने के कारण उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। जैसे ही फैसला आएगा, आवारा पशु पकड़कर वहां भेज दिए जाएंगे। तब तक निगम हद में आने वाली दूसरी गौशालाओं से सहयोग मांगा है। सरकार की तरफ से लगाया गया काउ सेस भी नई गौशाला को ही मिलना है।
नगर निगम कर्ताधर्ताओं की लापरवाही... वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं
शहर में 500 आवारा पशु, 200 डेयरियां : निगम अपने आंकड़ों में दावा करता है कि उसने डेयरियां शहर से बाहर शिफ्ट कर दी हैं, मगर उसी के कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते अभी भी 200 डेयरियां शहर में हैं और सड़कों पर 500 से ज्यादा आवारा पशु बेखौफ घूमते हैं।
अहाता भर जाने का बहाना : निगम ने डी-डिवीजन थाने के पास आवारा पशुओं को पकड़कर रखने के लिए अहाता बनाया है। इसकी क्षमता 40 बताई जाती है और वर्तमान में यहां 43 पशु हैं। ऐसे में अगर कहीं से आवारा पशुओं के आतंक की कोई शिकायत आती है तो निगम मुलाजिम जगह न होने का तर्क देकर कर्तव्य पूरा कर लेते हैं।
निगम भौड़ीवाला गौशाला का साढ़े 21 लाख रुपए का देनदार : निगम ने आवारा पशुओं को रखने के लिए रामतीर्थ स्थित बाबा भौड़ीवाला गौशाला से करार किया था। उसने 2016-17 में 24 और 2017-18 में 123 पशु पकड़कर गौशाला भेजे। करार के मुताबिक तय रकम का भुगतान निगम ने आठ साल से गौशाला को नहीं किया। ये रकम साढ़े 21 लाख रुपए बनती हैं। पैसे न मिलने पर गौशाला प्रबंधन ने नगर निगम से पशु लेने से इनकार कर दिया।