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अब पहली जून से तैयार होगी नीले और सफेद रंग की बर्फ

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार की तरफ से लाजिमी करार दिए गए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत जिले में भी बर्फ की क्वालिटी सुधारते हुए इस सफेद और नीले दो रंगों में तैयार करने के लिए सेहत विभाग तैयार हो चुका है। विभाग ने इसके लिए बर्फ बनाने वालों की बैठक भी इसी हफ्ते बुला ली है, ताकि यह लोग मानकों पर आधारित बर्फ ही तैयार करें, क्योंकि पहली जून से इसी अमली रूप दे दिया जाएगा।

पहले नहीं था कोई मानक

जिला सेहत अफसर डॉ. लखबीर सिंह भागोवालिया ने अभी तक बाजार में बिकने वाली बर्फ का रंग सफेद होता है। ऐसे में पता नहीं चलता कि कौन सी बर्फ खाने वाली है और कौन सी न खाने वाली है। साथ ही अभी तक बर्फ बनाने वाली फैक्टरियों के लिए मानक भी नहीं थे। वे चाहे जैसे भी पानी से बर्फ बनाते थे। चूंकि बर्फ जमने के बाद पता नहीं लगता है कि पानी कैसा है। इसलिए इस बात का फायदा उठाकर फैक्टरी वाले अखाद्य बर्फ को भी खाद्य बताकर बाजार में बेचते थे।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट

बर्फ की फैक्टरियां अब नहीं कर सकेंगी सेहत से खिलवाड़, एक्ट लागू करने को सेहत विभाग ने बुलाई बैठक

जिला सेहत अफसर डॉ. लखबीर सिंह भागोवालिया मिलावटखोरी और स्वच्छता के बारे में खाने-पीने की वस्तुएं बेचने वालों को समझाते हुए।

जिले में 22 फैक्टरियां

सेहत विभाग के मुताबिक जिले में कुल 22 बर्फ की फैक्ट्रियां हैं, इसमें से 10 शहर में हैं और बाकी की 12 जिले के विभिन्न कस्बों में। फिलहाल अब इनको दो रंग की बर्फ बनाने की गारंटी देते हुए लाइसेंस भी लेना होगा। अगर लाइसेंस नहीं लिया तो फैक्ट्री बंद कर दी जाएगी।

खाने लायक होगी सफेद बर्फ

सेहत अफसर डॉ. भागोवालिया ने बताया कि एक्ट के मुताबिक पहली जून से जो सफेद रंग की बर्फ तैयार होगी वह शुद्ध व खाने लायक होगी। इसे बनाने के लिए फैक्टरी मालिक को पीने लायक पानी का इस्तेमाल करना होगा। यह बर्फ पीने के अलावा विभिन्न तरीकों से खाने में प्रयोग लाई जा सकेगी। विभाग की तरफ से इसके लिए लाइसेंस भी जरूरी होगा और इसकी समय-समय पर चैकिंग भी होती रहेगी।

वस्तुओं को ठंडा करने में इस्तेमाल होगी नीली बर्फ

नीली बर्फ, जो कि खाने के लिए नहीं होगी में सरकार ने दो रंग मिलाने की मंजूरी दी है। फैक्टरी मालिक को बर्फ तैयार करने वाले पानी में खाने का रंग यानी इंडिगो केरामाइन या ब्रिलियंट ब्ल्यू को 10 पीपीएम तक मिलाना होगा। इससे बर्फ का रंग बदल जाएगा और वह नीली दिखनी लगेगी। जिससे आसानी से पता चल जाएगा कि बर्फ खाने वाली नहीं है। इसे सिर्फ वस्तुओं को ठंडा करने के काम में लाया जा सकेगा।

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