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ईएसआई अस्पताल में टूटीं खिड़कियां, एयर कूलर खराब, मेन गेट की सड़क पर डाली मिट्टी

3 वर्ष पहले
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गरीब-मजदूर अगर बदहाल हैं तो उनको सेहत सेवाएं देने वाला ईएसआई अस्पताल भी उनसे कम खस्ताहाल नहीं है। इसकी हालत को अस्पताल की टूटी खिड़कियां, खराब एयर कूलर आदि ब्यां करते हैं। खास बात तो यह है कि इस अस्पताल में रजिस्टर्ड एक लाख लोग इलाज करवाते हैं। यही नहीं बल्कि इससे 9 और सब अस्पताल जुड़े हुए हैं। मजदूर तबके के इलाज के लिए बने इस अस्पताल की चारदीवारी अर्से से टूटी हुई है और इसके कारण यहां पर अक्सर असामाजिक तत्व घुस आते हैं। अस्पताल के खाली पड़े हिस्सों में झाड़ियां उगी हुई हैं। अस्पताल के भीतर खिड़कियां, एयर कूलर, टॉयलेट से लेकर अस्पताल परिसर की सड़कें गड्ढों से अटी पड़ी हैं।

9 और सेंटरों का संचालन

अमृतसर ईएसआई के सब स्टेशन वेरका, गोइंदवाल साहिब, तरन तारन, बटाला, छेहर्टा, अबोहर, धारीवाल, दीनानगर तथा पठानकोट में स्थापित हैं और सेहत सेवाएं देते हैं।

टेंडर जारी करने की मांग

पंजाब फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रधान शमशेर सिंह कोरी तथा महासचिव अशोक शर्मा ने सेहत विभाग से मांग की है कि अस्पताल के मेंटेंनेस स के लिए टेंडरिंग जल्द की जाए, ताकि समस्या हल हो सके।

1.5 करोड़ फंड जारी लेकिन टेंडरिंग में फंसा पेच

विगत में सेहत मंत्री ने यहां के दौरे के दौरान भरोसा दिया था कि इस अस्पताल को जल्द ही सुधार दिया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन ने भी सारी वस्तुस्थिति को लिख कर सरकार को भेज दिया था और करीब आठ महीने पहले 1.5 करोड़ का फंड भी रिलीज हुई लेकिन टेंडरिंग प्रक्रिया रुकने के कारण काम सिरे नहीं चढ़ रहा है।

सुविधाओं से लैस करवाने को जल्द करवाए जाएंगे टेंडर

इस संदर्भ में अस्पताल की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरिंदर कौर का कहना है कि सेहत विभाग इस तरफ पहल के आधार पर काम कर रहा है और इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए जल्द ही टेंडरिंग की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है। ताकि मरीजों और स्टाफ को समस्या न आ सके। टेंडरिंग के बाद इसकी मेंटेननेस हो सकेगी।

मिट्टी से रिपेयर की सड़क

अमृतसर ईएसआई अस्पताल के मेन गेट की सड़क काफी समय से टूटी हुई थी। आते-जाते दिक्कत तो होती ही थी बल्कि इन गड्ढों में पानी भर आता था। इससे बचने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने खुद मिट्टी से उसे रिपेयर करवा दिया है। इसकी मिट्टी उड़-उड़ कर परेशानी पैदा करती है, थोड़ी सी भी बारिश हो तो कीचड़ की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में मरीजों और स्टाफ को बेहद परेशानी होती है।

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