बीस दिनों बाद भी किरन बाला मामले में एसजीपीसी की जांच कमेटी के हाथ खाली
किरण बाला मामले में सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने अंदर भी झांकते हुए मामले की जांच के लिए कमेटी प्रधान गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एक सब कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी ने मामले की जांच करते हुए 20 दिन में रिपोर्ट प्रधान को पेश करनी थी। 25 अप्रैल को बनाई कमेटी ने मंगलवार को 20 दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई रिपोर्ट पेश नहीं की। बताते चलें कि इस मामले में बनाई कमेटी की अभी तक केवल एक ही मीटिंग हुई है। वह भी बिना किसी नतीजे पर पहुंचे बिना ही उठ गई थी। कमेटी में अंतरिम कमेटी के मेंबर एडवोकेट भगवंत सिंह स्यालिका, रविंदर सिंह चक, गुरतेज सिंह ढडे और सुरिंदर सिंह बूलेवाल राठा को शामिल किया गया था। अतिरिक्त सचिव जसविंदर सिंह दीनपुर को कोआर्डिनेटर लगाया गया था। दीनपुर को अब श्री दरबार साहिब का मैनेजर बनाया जा चुका है।
बताते चलें कि 12 अप्रैल को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब में खालसा साजना दिवस मनाने लिए गए जत्थे में गई किरण बाला गायब हो गई थी। जिसके बारे जत्थे के लोगों को बाद में पता चला, जब गायब हुई किरण द्वारा धर्म बदल कर एक मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने का मामला सामने आया। उसी दिन से ही एसजीपीसी इसके लिए दोनों मुल्कों की खुफिया एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराती रहीं। कमेटी ने तो इस मामले में एजेंसियों की नाकामी की पोल खोली थी। काफी दिन खुफिया तंत्र को कोसने के बाद एसजीपीसी को अपने प्रबंधों में खामी ढूंढने की याद आई।
किरणबाला को जत्थे के साथ भेजने लिए पूर्व अकाली मंत्री के पीए के कहने पर श्री दरबार साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने सिफारिश की थी। पीए का नाम मीडिया में उछलने के बाद मैनेजर की बदली कर दी गई थी। भंगाली की जगह जसविंदर सिंह दीनपुर को मैनेजर लगा दिया गया था।