यूरिनल पाइप बदलने को एक मरीज दिन भर करता रहा इंतजार, दूसरे को बुलाया गया, पर आपरेशन नहीं किया
गुरु नानक देव अस्पताल में लाख कोशिशों के बावजूद मरीजों के प्रति डॉक्टरों के रवैये में सुधार नहीं आ रहा है। हालांकि इसको लेकर समय-समय पर विभागीय लोगों को फटकार भी लगती रही है, लेकिन स्थिति वहीं की वहीं खड़ी हैै। मंगलवार को अस्पताल में आए दो मरीजों को डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर खूब परेशान किया, एक तो बिना इलाज के ही वापस चला गया, जबकि दूसरे की तीमारदारी के लिए मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को दखल देना पड़ा।
लड़की की अंगुली का नहीं किया आपरेशन
अस्पताल के पांचवीं मंजिल पर स्थित यूरोलॉजी विभाग में दाखिल गुरदास पुर की सुनीता अपनी मां व पिता के साथ अंगुली का ऑपरेशन करवाने सोमवार को आई थी। उसके पिता नियामत ने बताया कि संबंधित डॉक्टरों ने चेक करके ऑपरेशन के लिए बुलाया था और यहां आने पर 3,500 रुपए का सामान की भी खरीद करवा दी। जब ऑपरेशन की बारी आई तो कहा कि शुक्रवार को आना।
नियामत का कहना है कि डॉक्टरों के चक्कर में उनका 5,000 के करीब खर्च हो गया और दो दिन तक अस्पताल में सिर्फ चाय पीकर गुजारना पड़ा। आखिर में यह लोग वापस चले गए।
बुजुर्ग की हालत पर भी नहीं आया तरस
ध्यानपुर से आए 70 वर्षीय जगदीश सिंह को उनके बेटे जसविंदर सिंह मंगलवार की सुबह लेकर आए थे। आठ सालों से उनको पेशाब की परेशानी है और उसे यूरिनल पाइप से उतारा जाता है। जसविंदर का कहना है कि उनको दाखिल तो कर लिया गया लेकिन जब पाइप बदलने को कहा गया तो डॉक्टरों ने इमरजेंसी में भेज दिया। इमरजेंसी वालों ने सर्जिकल में जाने की सलाह दी। सर्जिकल वालों ने फिर यूरोलॉजी में लाने को कहा। दोपहर तक यही बहाना चलता रहा। उनका कहना है कि उन्होंने स्ट्रेचर की मांग की कि कम से कम मरीज को नीचे भिजवा दो वह लेकर चले जाएंगे लेकिन कोई नहीं सुना। मामले की जानकारी जब पास में रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट राजिंदर शर्मा को मिली तो वह पहुंचे और उन्होंने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुरिंदरपाल को फोन किया। एमएस के दखल के बाद पाइप बदली गई।