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जिला ओडीएफ घोषित, आनंदपुर प्रखंड में खुले में शौच जा रहे लोग

3 वर्ष पहले
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भले ही सरकार ने कागजी तौर पर जिले को शौच मुक्त (ओडीएफ) का दर्जा दे दिया हो। लेकिन धरातल पर देखा जाय तो आज भी कई ऐसे गांव है जहां महिलाएं डब्बा, मग के सहारे खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जिला में हाल ही में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तत्वाधान में 2011 व 2014 के बेसलाइन सर्वे के आधार पर 1.40 लाख चिह्नित परिवारों का शौचालय निर्माण को पूर्ण दर्शाते हुए पश्चमी सिंहभूम को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया था। लेकिन आनंदपुर प्रखंड में कुल 5466 शौचालयों में आज भी 1298 अधूरे है। प्रखंड में दोयम दर्जे का शौचालय का निर्माण किए जाने के वजह से 75 फीसदी ग्रामीण खुले में ही शौच करने को मजबूर है। कई लाभुक शौचालयों को कूड़ा करकट के साथ-साथ लकड़ी रखने का काम में ला रहे हैं। करोड़ों रुपयों की लागत से बने शौचालयों पर ग्रामीण गुणवत्ता पर भी सवाल उठा रहे हैं। यहां पूरी तरह से सरकारी राशि की लूट मची हुई है।

राशि आवंटित होने के बावजूद शौचालय अधूरे

पेयजल स्वच्छता विभाग के प्रखंड कॉ-ऑडिनेटर प्रकाश बोंगबोंगा व सामाजिक उत्प्रेरक श्वेता सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रखंड में कुल 5466 शौचालय निर्माण का का लक्ष्य दिया गया था। इसमें सभी पंचायतों के विभिन्न गांवों की ग्राम जल स्वच्छता समिति के खाते में शौचालय निर्माण के लिए राशि आवंटित की गई है। इसके बावजूद प्रखंड में 1298 शौचालय अधूरे है।

महज एक साल में दरारें

हरता पंचायत के कांडी गांव में लाभुकों ने बताया कि महज एक साल में ही निर्मित शौचालयों में कई प्रकार की खमियां नजर आने लगी हैं। शौचालय निर्माण के वक्त बिचौलिए के निर्देशानुसार मिस्त्री ने जमीन पर एक ईंट के लेबल से खुदाई कर दीवार खड़ी कर दी। वहीं टैंक की गहराई मात्र 2 फिट ही रखी। इसके अलाूवे नल अभी से उखड़ने लगा है। शौचालय में निम्न स्तर का दरवाजा लगाने के कारण टेढ़े मेढे होने के साथ क्षतिग्रस्त भी हो गया है। छत के छज्जे पर लोहा की रॉड की बजाय लकड़ी का टुकड़ा लगाया गया है। इधर लोगों को शौचालय की चौड़ाई कम होने की वजह से पैन पर बैठने में काफी परेशानी होती है।

खुले में शौच जाती महिला।

आनंदपुर प्रखंड में एसबीएम फंड के तहत शौचालयों का निर्माण कार्य चल रहा है। बाकी शौचालयों में कार्य प्रगति पर है जल्द ही इन्हें पूरा कर लिया जाएगा। मनोज तिवारी, बीडीओ, आनंदपुर प्रखंड

दोयम दर्जे पर शौचालय का निर्माण किया गया है। शौचालय में पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। दरारें भी उभर आई है गड्ढे की गहराई भी कम है। जिसके कारण हमें मजबूरन खुले में शौच करना पड़ रहा है। अलिसा भुईया, लाभुक मुंडा टोला, कांडी

शौचालय का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण के नाम पर दीवारें खड़ी की गई है। कई शौचालयों के छज्जे में लोहे का रॉड की जगह लकड़ी का टुकड़ा लगाया गया है। बोदरा बरजो, लाभुक, हंसाबेडा ।

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