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श्रीजांग में कभी नक्सलियों का था बसेरा, अब बेखौफ रहते हैं लोग

3 वर्ष पहले
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आनंदपुर प्रखंड मुख्यालय से लगभग 30 किमी की दूरी में पहाड़ों की चोटी में बसे श्रीजांग गांव में एक दशक में बहुत कुछ बदल गया है। इस गांव में कभी नक्सलियों का डेरा रहता था। पुलिस तक नहीं जाती थी। लेकिन एक नक्सल घटना ने बहुत कुछ बदल दिया। दरअसल यहां एक बार एक उग्रवादी नेता किसी लड़की को उठा ले गया था। इसके बाद पूरा गांव जुट गया। विरोध करने लगा। अड़ गए। ग्रामीणों की नाराजगी ऐसी रही कि दोबारा यहां कोई अासमाजिक तत्व नहीं आया। इसके बाद बरला टोला, डाहंगा टोला, किसान टोला, गंझु टोला, होरो टोला, सांबटी टोला में प्रशासनिक पहुंच भी होने लगी। यहां लगभग 80 परिवारों का बसेरा है। गांव में इसी साल बिजली पहुंची है। सड़क है पर पक्की नहीं। गांव के लोग मानते हैं कि प्रशासन की अच्छी पहल के कारण गांव में शांति है। वही गांव में मूलभूत समस्याओं का निपटारा होना शुरू हो गया है ।

एकजुट हुए ग्रामीण तो भागे नक्सली, प्रखंड मुख्यालय से 30 किमी दूर पहाड़ी की चोटी पर हैं गांव

नक्सलियों का सेफ जोन था

पूर्व में श्रीजांग गांव में पीएलएफआई समेत अन्य नक्सली संगठनों का डेरा जमा रहता था। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं थी। पुलिस प्रशासन एंव अन्य सरकारी अधिकारियों को गांव तक पहुंचने के लिए सोचना पड़ता था। गांव पहाड़ी की चोटी में बसे होने के करण नक्सलियों को पुलिस की गतिविधि का आसानी से पता लग जाता था। इस वजह से नक्सली श्रीजांग को अपना सेफ जॉन मानते थे।

श्रीजांग में पानी-सड़क की नहीं है व्यवस्था, चुएं से पानी लेतीं महिलाएं।

इधर, गांव में चुआं का पानी ही सहारा, चापाकल की मांग

पूर्व में गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती थी । लोग पहाड़ी के रास्ते से गांव के गलियारे तक पहुंचते थे। श्रीजांग के लोगों को पानी की समस्या से निजात नहीं मिला है गांव में एक भी सरकारी नलकूप नहीं है। लोग एक मात्र ढुडी चुएं के पानी से प्यास बुझाते हैं। ग्रामीण बिरसा कंडुलना, मरियम कंडुलना, पदनी कंडुलना, एतवा होरो, बिरसा बरला आदि ने बताया कि गांव में पानी की बड़ी जटिल समस्या है। सांबाटी टोले के 6 परिवार 1.5 किमी का रास्ता तय कर हरता गांव से पेयजल की पूर्ति करते है। जानकरी के अनुसार इस टोले में असियन होरो के घर के बगल में एसआर के तहत नलकूप खुदवाने की बात चली थी मगर विभाग ने इस पर चुप्पी साध ली।

पहले गांव तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण बोरिंग गाड़ी नहीं पहुंच पाता था। लेकिन अब जल्द ही डीएमएफटी फंड के तहत श्रीजांग में नलकूप खुदवाया जाएगा। जिला में लिस्ट भेजा गया है। मंगल बहंदा, जेई, जलापूर्ति विभाग, आनंदपुर।

पूर्व में श्रीजांग गांव में नक्सलियों का सेफ जॉन माना जाता था। जिसके कारण गांव के लोग भयभीत रहते थे। पुलिस प्रशासन के द्वारा लगातार अभियान व छापामारी के कारण नक्सलियों की गतिविधियों पर शिकंजा कसा गया है। जहां तक श्रीजांग गांव में पानी की समस्या है। मो आजाद खान, आनंदपुर थाना प्रभारी।

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