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खेतों के बीच श्मशान, दमकल बुलाकर होता है संस्कार

3 वर्ष पहले
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क्षेत्र के मोलकी की गांव में अंतिम संस्कार करने के लिए भी ग्रामीणों को काफी परेशानी झोलनी पड़ती है। ऐसा ही मामला सोमवार को सामने आया। यहां पर वैकल्पिक बने हुए श्मशान की स्थिति खेतों के बीचोंबीच होने के चलते यहां पर दाह संस्कार करना भी काफी परेशानी भरा होता है। सोमवार को भी गांव के रामनाथ मेघवाल (60) की मृत्यु होने के बाद में उनको दाह संस्कार के लिए खेतों के बीच बने हुए श्मशान में ले जाया गया, लेकिन आसपास के खेतों में आग लगने की आशंका से दाह संस्कार नहीं किया गया। इसके बाद में अंता पुलिस को सूचना दी गई। एसआई स्वागत पांडे ने बताया कि मोलखी गांव से सोमवार को अंता थाने में सूचना आई की यहां पर श्मशान में दाह संस्कार कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसके चलते आसपास के खेतों में आग लग सकती है। जिससे कोई दुर्घटना हो सकती है, सूचना पर घटनास्थल पर फायर ब्रिगेड भेजी गई। उस फायर ब्रिगेड से दाह संस्कार स्थल के आसपास पानी डाला गया। इसके बाद में दाह संस्कार किया गया। इस गांव में जब भी किसी का दाह संस्कार किया जाता है, तो वह मुसीबत ही साबित होता है, क्योंकि यहां पर स्थाई रूप से शमशान का निर्माण नहीं हुआ है, जो शमशान है, वह खेतों के बीचों बीच मौजूद है। जहां तक के न जाने का रास्ता है, न ही चारदीवारी, जिसके चलते आसपास के खेतों में अनहोनी घटना घटने का अंदेशा बना हुआ रहता है।

आगजनी की आशंका

इस गांव में जब भी किसी का दाह संस्कार किया जाता है, तो इसके लिए झेलते हैं परेशानी

अंता. मोलकी गांव में खेतों के बीच अंतिम संस्कार से पहले फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी।

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