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जेल में कैदी ने किया खुदकुशी का प्रयास, दूसरे कैदी ने बचाया

3 वर्ष पहले
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जेल में बंद एक कैदी ने रविवार को फांसी लगाकर खुदकुशी करने का प्रयास किया। वह अपने गर्दन में कपड़ा फंसा कर पेड़ से लटकने का प्रयास कर रहा था। तभी हो-हल्ला हो गया। दूसरे बंदी ने उसे पकड़ कर जेल प्रशासन के हवाले किया। कैदी का नाम लालबहादूर सिंह है। इस प्रकरण में जेल प्रशासन पर कैदी के मानसिक प्रताड़ना का आरोप लग रहा है। इधर, जेल प्रशासन ने कहा कि कैदी नशे का आदी हो गया है। जेल में नशा नहीं मिलने की वजह से टेंशन में आकर आत्महत्या का प्रयास कर रहा था। घटना को लेकर मंडलकारा में अफरा-तफरी मची रही। मामले की जानकारी मिलते ही जेल के डॉक्टर ने लालबहादूर का इलाज शुरू किया। फिलहाल बंदी खतरे से बाहर बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बिहिया क्षेत्र के बिहिया का रहने वाले लाल बहादुर सिंह को दो माह पहले स्थानीय पुलिस ने मारपीट और नशा करने के मामले में गिरफ्तार किया था। रविवार को वह काफी टेंशन में था। अपने वार्ड के बाहर निकलकर एक पेड़ के पास पहुचा। इधर-उधर देखा कि कोई नहीं है। इसके बाद अपने गले में गमछा फंसा कर पेड़ पर लटकने का प्रयास करने लगा। तभी कुछ बंदियों ने लाल बहादुर सिंह को देख लिया। इसके बाद पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि जेल प्रशासन उसे किसी अन्य जेल में स्थानांतरण करने वाला था। जबकि, प्रशासन के अधिकारियों ने ऐसे किसी भी मामले से इनकार कर किया। उनका कहना है कि कैदी नशे का आदी रहा है। इस कारण उसने यह कदम उठाने का प्रयास किया।

हेरोईन की लत है, नहीं मिलने से था बेचैन, कोई अन्य वजह नहीं

मंडल कारा के जेलर ने कहा कि बिहिया के रहने वाले बंदी लालबाबू को 2 महीने पहले हेरोईन पीने के मामले में बिहिया पुलिस ने पकड़ा है। एक कैदी ने आकर सूचना दिया था कि पेड़ पर गमछा फेंकने का प्रयास लालबाबू कर रहा था। अन्य बंदी उसे मेरे पास लाए। हेरोईन नहीं मिलने की वजह से वह बेचैन रहता था। इस कारण उसने ऐसा करने का प्रयास किया। स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।

10 मार्च को भी एक कैदी ने किया था खुदकुशी का प्रयास

बीते 10 मार्च को भी मंडल कारा के एक बंदी छोटू मिश्रा ने आत्महत्या करने का प्रयास किया था। एक साल से हत्या के मामले में मंडल कारा, आरा में बंद छोटू मिश्रा काफी तनाव में रहता था। बीते 10 मार्च को फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। उस वक्त भी अन्य बंदियों ने समय रहते आरा प्रशासन को इसकी सूचना दी और तत्काल इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल लाया गया था। जिसके कारण उसकी जान बच गई थी।

गलत है कैदी की प्रताड़ना का अारोप: जेल अधीक्षक

जेल अधीक्षक निरंजन पंडित ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप से इंकार करते हुए कहा कि प्रताड़ना का आरोप गलत है। किसी ने साजिश की है।

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