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बोले- उनकी रचनाओं में छायावाद व आदर्शवाद का है समन्वय

3 वर्ष पहले
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कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती वरिष्ठ नागरिक कल्याण संघ के मौलाबाग कार्यालय में मनाई गई। अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष साहित्यकार ए.के अांसू ने की। मोहन प्रसाद और अनिल कुमार सिन्हा ने समारोह का उद्घाटन किया। इस मौके पर ए.के.आंसू ने कहा कि सुमित्रानंद पंत छायावाद के प्रमुख चार प्रमुख कवि और कवियित्रियों में से एक हैं। प्रकृति इनके काव्य रचना का प्रधान विषय है। उनके काव्य में प्रकृति के विविध रूपों का सजीव चित्रण हुआ है। सुमित्रानंद पंत प्रकृति के सुकुमार कवि थे। आमतौर पर शृंगार रस की रचनाओं में नारी सौंदर्य वर्णन की प्रमुखता रहती है। लेकिन, पंतजी की रचनाओं में प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन मिलता है। पंत जी ने काव्य के अतिरिक्त कहानी, उपन्यास, समीक्षा और नाटक भी लिखा है। उनके प्रमुख काव्य संग्रह में वीणा, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, उत्तरायण व शिल्पी प्रमुख है। उपन्यास में हार व कहानी संग्रह में पांच कहानियां, नाटक में ज्योत्सना और समीक्षा में गद्य-पथ प्रसिद्ध रचना है। पंत जी को सरस्वती अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शुकदेव शर्मा ने कहा कि पंतजी साहित्यकार के अलावे महान चिंतक भी थे।जीवन के समस्त तत्वों का समन्वय उनका जीवन दर्शन रहा है। यही उनका आदर्शवाद है। जयंती समारोह को जगदयाल सिंह, जयकृष्ण सिंह, विश्वनाथ लाल, बैजनाथ कुमार सिन्हा, कन्हैया बाबू ने संबोधित किया। कार्यक्रम संचालन उमाशंकर तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन कन्हैया प्रसाद ने किया। कृष्णा प्रसाद, लाल बाबू, रामेश्वर प्रसाद अवध लाल व अन्य उपस्थित थे।

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