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तीन की बजाए 20 मीटर हो रही खुदाई

3 वर्ष पहले
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सुनहले रेत के काले व्यवसाय से जुड़े बालू माफिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की अनदेखी कर उत्खनन कर रहे हैं। खनन व भूतत्व विभाग ने 5 एकड़ से कम घनत्व वाले क्षेत्र में बालू खनन की मंजूरी दी थी। इस नियम का भी पालन घाट संचालक व बालू कंपनी नहीं कर रही है। विदित हो कि एनजीटी ने पर्यावरण को दूषित होता देख बालू घाट ही बन्द कर दिया था। बाद में ‘सिया’ व अब ‘डिया’ प्रावधान के दायरे में रह बालू खनन को मंजूरी दी थी।

ड्रोन से पता चला कि तय क्षेत्र से ज्यादा इलाके में हो रहा खनन

खनन विभाग को सूचना मिली थी कि कोईलवर टीबी सेंटोरियम बालू घाट समेत कई बालू घाटों पर विभाग द्वारा तय मापदण्ड से ज्यादा क्षेत्रफल में बालू का उत्खनन हो रहा है। जिसे लेकर विभाग द्वारा ड्रोन व कम्पास से मापी करायी गयी तो जानकारी मिली की टीबी सेंटोरियम बालू घाट पर दस मीटर ज्यादा क्षेत्र में बालू का अंधाधुंध उत्खनन का खेल चल रहा है। वहीँ तीन मीटर या बालू उससे पहले बालू के साथ पानी आ जाने पर वहॉ उत्खनन नही करना है। लेकिन जेसीबी ऑपरेटर, घाट संचालक बीस मीटर खुदाई कर पानी से सना बालू ट्रको पर लोड कर रहे है। जिसे लेकर खनन विभाग के पदाधिकारियो ने ब्रॉडसन कंपनी को नोटिस भी भेजा है। पदाधिकारियो द्वारा नोटिस भेजे जाने के बाद भी घाट संचालक के मिलीभगत से सुनहले रेत का कारोबार फल फूल रहा है।

गहरे गड्‌ढे में डूब हुई हैं कई मौत

इधर कोईलवर में सोन नद में अंधाधुंध बालू उत्खनन से सोन बदरंग हो गया है। वहीं जुलाई माह में सोन में पानी भरने के साथ ही लोगों में भय सता रहा है कि मशीनों के खोदे बीस मीटर के गड्ढे में फंसकर कई लोग जान से हाथ गंवा बैठेंगे। पिछले वर्ष ऐसे ही पानी से भरे गड्ढे में फंसकर एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी।

किसी घाट पर नहीं लगा धर्मकांटा

8 जनवरी को जिलाधिकारी ने कई बालू घाटों का निरीक्षण किया था। उन्होंने खनन अफसरों से कहा था कि सभी बालू घाट पर खदान तक पहुंचने के लिए चेक पोस्ट, ड्रॉप गेट, सीसीटीवी, बिजली, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा प्रहरी, धर्मकांटा की व्यवस्था करनी है। लेकिन भोजपुर में 39 घाट में शायद ही ऐसा कोई बालू घाट है, जहां ये सुविधाएं हैं। कार्रवाई के नाम पर टीबी सेंटोरियम बालू घाट पर पूर्व में इन नियमों की अनदेखी पर तारा रजत प्राइवेट लिमिटेड सेटली को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था।

मजदूरों के बदले मशीन से हो रहा उत्खनन

भोजपुर डीएम व खनन विभाग के पदाधिकारियों ने पूर्व में निरीक्षण के दौरान संवेदक को दिन में मजदूरों से काम लेने को कहा था। लेकिन इसका असर कहीं नहीं दिखा रहा है। दिन में मजदूरों के बदले जेसीबी व पोकलेन से ट्रकों पर बालू लोड किया जा रहा है। वहीं मजदूर बेरोजगार बैठे हैं। मजदूरों ने कहा कि पहले दिन में तीन सौ रुपए कमा लेते थे। अब मशीन आ जाने से खाने तक को लाले पड़ गए हैं।

ड्रोन और कम्पास से मापी करायी है नियमों की अनदेखी पर भेजी है नोटिस

तय क्षेत्रफल से ज्यादा क्षेत्र में बालू उत्खनन का मामला सामने आया है। जिसे लेकर ड्रोन कैमरा व कम्पास से मापी करायी गयी है। जिसमें क्षेत्रफल से कुछ मीटर ज्यादा परिधि में उत्खनन पर बालू कंपनी को नोटिस भेजा गया है। वहीं तीन मीटर से ज्यादा गहरा उत्खनन करने व नियमों की अनदेखी पर घाट संचालक पर कारवाई की जाएगी। सुनील कुमार, खनिज पदाधिकारी,भोजपुर

सोन घाट पर गहरी खुदाई करता पोकलेन

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