वाणिज्य संकाय में मात्र 3 शिक्षक जो पढ़ाते है 2000 विद्यार्थियों को
सिटी रिपोर्टर | आरा
शहर के हर प्रसाद दास जैन कॉलेज शिक्षकों की कमी से पढ़ाई बाधित हो रही है, बावजूद यहां शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही। यहां 250 छात्रों पर महज एक शिक्षक कार्यरत है। वहीं वाणिज्य संकाय की बात करें तो लगभग 2 हजार विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए सिर्फ तीन प्रोफेसर कार्यरत हैं। कुछ ऐसा ही हाल अन्य विभागों का भी है। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आंकड़ों की माने तो एचडी जैन कॉलेज में छात्रों की संख्या लगभग 15 हजार है। जबकि शिक्षकों की संख्या सिर्फ 65 है। ये हाल तब है जबकि एक शिक्षक पर 70 विद्यार्थी ही होने चाहिए। भास्कर टीम ने यहां की व्यवस्था की पड़ताल की तो पत्ता चला कि अच्छी पढ़ाई के अभाव में यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी महाविद्यालय में सिर्फ परीक्षा फार्म ही भरने आते हैं। जबकि विश्वविद्यालय का यह कड़ा निर्देश कि जिन छात्रों का पूरे सत्र में 70 फीसदी उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, तो वैसे छात्र या फिर छात्राओं का परीक्षा फार्म भरा ही नहीं जाएगा।
कॉलेज में 15 हजार छात्र फिर भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
एचडी जैन कॉलेज में स्वीकृति से आधे ही शिक्षक, पढ़ाई बाधित
कॉलेज की स्थापना 1942 में दानवीर हरप्रसाद दास जैन ने की थी
75 प्रतिशत उपस्थिति कैसे
अब यह बड़ा सवाल है कि जब कॉलेज में महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं और वर्ग भी संचालित नहीं होता तो छात्रोंं का 75 प्रतिशत उपस्थिति कैसे दर्ज होती होगी।
सबसे जयादा छात्र कला संकाय में
छात्रों की संख्या में सबसे ज्यादा कला संकाय में 9500 छात्र है। विज्ञान संकाय में लगभग 5 हजार, तो वहीं वाणिज्य संकाय में लगभग 2 हजार छात्र-छात्रों की संख्या है। कला संकाय में 41, विज्ञान संकाय में 19 तो वहीं वाणिज्य संकाय में मात्र 3 शिक्षक ही हैं। अब अनुमान लगाया जा सकता है जहां शिक्षक ही नहीं हैं वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की आखिरकार पढ़ाई कैसे पूरी होगी और उनका परीक्षा परिणाम कैसे अच्छा आएगा। इसके लिए क्या हमारा सिस्टम जिम्मेदार नहीं। इस बदहाल व्यवस्था पर जब हमने काॅलेज प्रशासन से बात की तो सभी ने अपनी अलग-अलग राय दी और प्रोफेसरों की नियुक्ति की बात कही।
132 पद सृजित हैं शिक्षकों के
यहां शिक्षकों के 132 पद सृजित है जिसकी तुलना में यहां महज 65 शिक्षक ही कार्यरत है। मतलब साफ है 250 छात्र व छात्राओं पर एक शिक्षक। अंग्रेजी, गणित, उर्दू, अर्थ शास्त्र, इतिहास, संस्कृत, दर्शन शास्त्र, समाज शास्त्र समेत कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी है। वहीं विज्ञान के रसायन शास्त्र में एक भी शिक्षक नहीं हैं।
कॉलेज प्रशासन को भी होती है परेशानी
काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. शैलेन्द्र ओझा का कहना है कि कई विषयों के शिक्षक के नहीं होने से काॅलेज प्रशासन और यहां पढ़ने वाली छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह परेशानी बहुत कम दिनों की है। सबकुछ राज्य सरकार के ऊपर निर्भर करता है कि काॅलेज में शिक्षकों के बहाली की प्रकिया कब शुरू होगी। वहीं, विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण पदाधिकारी डॉ. पारस राय ने कहा है कि शिक्षकों की कमी है। लेकिन राज्य सरकार शिक्षकों की बहाली जब तक नहीं करती, जो व्यवस्था है उसी में काम चलाना हाेगा। निकटतम भविष्य में इस समस्या का हल होने की उम्मीद है।
1942 में हुई थी कॉलेज की स्थापना
हर प्रसाद दास जैन कॉलेज की स्थापना 1942 में हुई थी। दानवीर एचडी जैन ने छात्रों की पढ़ाई के लिए इसे दान में दिया, ताकि आरा शहर के छात्रों को पढ़ने के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। बहरहाल चाणक्य, बुद्ध, महावीर जैसे ज्ञान र| की धरती रही बिहार आज शैक्षणिक अराजकता का शिकार है। अगर यहां की शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश नहीं की गई तो बिहार में टाॅपर स्कैम जैसी घटना को भविष्य में भी नकारा नहीं जा सकता।