प्रगतिशील लेखक संघ, भोजपुरी शोध एवं विकास ट्रस्ट तथा समकालीन कलाकारों की रंग संस्था आवाज ने लोक कलाकार भिखारी ठाकुर और भोजपुरी साहित्य विषय पर हर प्रसाद दास जैन धर्मशाला में गोष्ठी की। मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अशोक शाश्वत, विशिष्ठ अतिथि संकल्प नाट्य संस्था बलिया के सचिव आशीष त्रिवेदी, रामानंद तिवारी स्मृति संस्थान बिहार के संयोजक डॉ अरूण भोले तथा भोजपुरी जन जागरण अभियान बिहार प्रदेश अध्यक्ष कुमुद पटेल थे। उद्घाटन डा विश्वनाथ शर्मा ने किया। डा रविन्द्र शाहाबादी ने कहा कि भिखारी ठाकुर के साहित्य में लोक सामर्थ के कारण ही उनका साहित्य टिका रहा। रंगसंस्था आवाज के सचिव अनूप अवलीक ने कहा कि भोजपुरी में व्याप्त अश्लीलता और फूहड़ता के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन का शुरूआत हो चुका है। आरा से पटना राजभवन और दिल्ली संसद भवन तक का मार्च करेंेगे। संगोष्ठी का संचालन कवि जनार्दन मिश्र के द्वारा किया गया। दिल्ली से आए मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अशोक शाश्वत ने कहा कि भोजपुरी की मान्यता के लिए पीआइएल दर्ज करने की जरूरत है। इसे कार्य में मैं पूर्ण सहयोग प्रदान करूंगा। कवि जनार्दन मिश्र ने कहा कि भोजपुरी का उदभव और विकास हीरा, महेन्द्र मिश्र और जनकवि भिखारी ठाकुर से अति समृद्ध हुई है और हमे मिलजुल कर और समृद्ध करना है। कार्यक्रम के आरंभ में इप्टा के नागेन्द्र नाथ पाण्डेय, अंजनी कुमार शर्मा और डा पंकज भट्ट द्वारा सामुहिक जनवादी गीत प्रस्तुत किया गया। वीकेएसयू के हिन्दी और भोजपुरी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष प्रो डा नीरज सिंह ने कहा कि भोजपुरी की समृद्धि केवल जन कवि भिखारी ठाकुर जी का स्मरण किए जाने तक नहीं रहना चाहिए उनके साहित्य की भावना को और भी मजबुत किए जाने की जरूरत है। प्रो डॉ दिवाकर पाण्डेय ने कहा कि जन कवि महेन्द्र मिश्र और भिखारी ठाकुर पर काम होना बाकी है जिसे किए जाने की जरूरत है। विशिष्ट आशिश त्रिवेदी, अरूण भोले, कुमुद पटेल ने भोजपुरी की मान्यता हेतु जन आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया। भोजपुरिया जन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत सिंह सहयोगी ने कहा कि राजनीतिज्ञ उपेक्षा कर रहे।
विचार-गोष्ठी
भोजपुरी के लिए आरा से पटना के राजभवन व दिल्ली की संसद तक मार्च करने और कोर्ट में पीआईएल करने का निर्णय
जैन धर्मशाला में भिखारी ठाकुर पर गोष्ठी को सम्बोधित करते वक्ता।