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कैंप तक ही सिमटी एसएसबी की गश्त, बच्चे कर रहे शराब की तस्करी, दुकानों में भी परोस रहे शराब

3 वर्ष पहले
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अररिया पुलिस शराबियों पर अंकुश लगाने के लिए चाहे लाख दावे कर ले लेकिन सीमा क्षेत्र के गांव व शहरों के लोग शाम ढलते ही नेपाल की ओर रूख कर जाते हैं। यह वैसे लोग हैं, जिन्हें शराब पीने की आदत से छुटकारा नहीं मिल सका है। शराब पीने-पिलाने का दौरान देर शाम तक चलता है। कुछ लोग खुली सीमा का लाभ उठा कर वापस लौट आते हैं वहीं कुछ लोग भाड़े के घरों में सुबह होने तक डेरा डंडा जमा लेते हैं। शराब तस्करों के लिए यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है।

सीमा पर एसएसबी की लगातार पैनी नजर रखने के बावजूद नो मैंस लैंड के निकट दर्जनों गैरकानूनी गतिविधियां हो रही है। फुलकाहा से सटे नेपाल के कप्तानगंज से इन दिनों बड़े पैमाने पर शराब लाई जा रही है। बच्चों के माध्यम से बॉर्डर तक शराब पहुंचाने का अनोखा रास्ता अख्तियार कर लिया गया है। तस्करी में लिप्त कुछ छोटे शराब तस्कर तो रोज पकड़े भी जा रहे हैं। लेकिन एसएसबी के हांथ अब तक बड़े तस्करों तक नहीं पहुंचे हैं जो कमरों में बैठ गिरोह का संचालन कर रहे हैं। शराब के गोरख धंधे की पड़ताल करती यह रिपार्ट ...

भारत नेपाल सीमा पर पथराहा से कोशिकापुर तक कोई रोक टोक करने वाला नहीं दिख रहा है। कुछ मोटर साइकिल सवार बोरी में सामान लादे नेपाल की ओर जा रहे हैं। कुछ लोग मवेशी लेकर नो मेंस के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बातचीत के दौरान कहा कि भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा के कारण अपराध पर अंकुश लगाना संभव नहीं है। स्थानीय लोग अक्सर तस्करों व अपराधियों से भयभीत रहने के लिए बाध्य हैं। अगर वे इसकी सूचना पुलिस-प्रशासन तक दे दें तो बात लीक होने का खतरा बन जाता है।

पकड़ से दूर हैं बड़े शराब माफिया छोटे तस्करों की होती है गिरफ्तारी

शराबी खुली सीमा का उठाते हैं लाभ, तस्करी करने वालाें काे नहीं पकड़ पाते एसएसबी जवान

शराब की खुली दुकान व गश्ती करते नेपाली प्रहरी।

पुलिस से बचने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शाम में पहुंचते हैं लोग

नेपाल में भारतीय नागरिकों के प्रवाह पर नजर रखने के लिए एपीएफ नेपाली पुलिस तो नजर आती है लेकिन एसएसबी 56 वीं बटालियन फुलकाहा बीओपी कैंप के जवानों की ड्यूटी सिर्फ कैम्पों तक ही दिख रही है। संवाद संकलन के दौरान एक भी एसएसबी जवान गश्ती करते नहीं दिखे। हालांकि स्थानीय थानाध्यक्ष चंद्र किशोर टुड्‌डू सीमा से सटे पथ पर गश्ती करते दिखते हैं। लेकिन यह उंट के मुंह में जीरा के समान प्रतीत होता है। भारत-नेपाल के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कोई जांच करने वाला नहीं है। नेपाली पुलिस से बचने के लिए भारत के शराब-प्रेमी नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में शाम के समय आते हैं, शराब पीते हैं और वहां रात बिताने के बाद दूसरे दिन अहले सुबह घर लौट जाते हैं। ऐसे में उनके पकड़े जाने का खतरा एक प्रतिशत भी नहीं होता।

समय- दिन के 2 बजे स्थान-फुलकाहा भारत-नेपाल सीमा

नो मेंस लैंड पर नेपाली सुरक्षाकर्मी मुस्तैद तो है लेकिन इस अंतर्राष्ट्रीय सीमा को नेपाली और भारतीय क्षेत्र के लोग बेरोकटोक पार कर रहे हैं। नो मेंस लैंड पर कहीं युवाओं की टोली गप्प मार रही है तो कहीं मवेशी बंधे हैं। सीमा के उस पार नेपाली क्षेत्र में कई शराब की दुकानों पर शराबियों का जमावड़ा है। लेकिन पास के स्कूल संचालन के कारण शराब विक्रेताअों में नेपाली सुरक्षा प्रहरी का जबरदस्त भय है। चोरी छुपे लोग आसपास के घरों में शराब पीते दिख रहे हैं। पूछने पर पता चलता है कि यहां शाम चार बजे के बाद ही शराब को सहज उपलब्ध कराया जा सकता है। अगर स्कूल के समय शराब पीने की छूट दे दी जाए तो नेपाली प्रहरी उन पर कार्रवाई कर देंगे।

दृश्य एक

समय - शाम के चार से पांच बजे तक। स्थान - फुलकाहा

कई लोग पिलर संख्या 189/2 मानिकपुर के समीप नेपाली क्षेत्र में सिमर कप्तानगंज की शराब की दुकानों में आ जा रहे हैं। ताज्जुब की बात है, शराब दुकान तो आगे से बंद रखी गई हैं, लेकिन पीछे के दरवाजे से पीने-पिलाने का सिलसिला अनवरत जारी है। शराबियों को बांस के एक घर के कमरे में ले जाकर छोटे-छोटे बच्चों के माध्यम से शराब परोसा जा रहा है। किसी भी बच्चे की उम्र 10 वर्ष से अधिक नहीं है। जिसे भास्कर ने कैमरे में कैद किया है।

दृश्य दो

जिला ही नहीं, बिहारियों के बल पर खुली हैं दुकानें

एक शराब विक्रेता ने बताया कि अररिया ही नहीं संपूर्ण बिहारियों के बल पर ही चहकती हैं, नेपाल की मधुशाला। खासकर सीमा से सटे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में शराबबंदी के बाद नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में न केवल शराब की दुकानें बढ़ी हैं, बल्कि कई साहसी भारतीय नागरिकों ने बिहार के पियक्कड़ों के लिए छोटे-छोटे बियर बार भी खोल रखे हैं।

एसएसबी इस मामले को लेकर गंभीर है, होगी जांच

गर्मी के दिनों मेें सुक्षात्मक दृष्टिकोण से जवानों को इधर-उधर किया गया है। मेन पावर की थोड़ी कमी हुई है, लेकिन ऐसा भी नहीं कि गश्ती में एक दो जवान भी न दिखें। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर एेसी बात है तो इसकी पड़ताल होगी। एसएसबी इस मामले को लेकर गंभीर हैं। मुकेश कुमार त्यागी, कमांडेंट

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