जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज होती जा रही है। सीमांचल के गांधी के नाम से चर्चित रहे मरहूम सांसद तस्लीमुद्दीन के बनाए दुर्ग को भेजने का प्रयास किया जा रहा है। 28 मई को होने वाले इस मतदान को लेकर राजद की ओर से तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र शाहनवाज आलम भी चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। वहीं एडीए के प्रत्याशी मुर्शीद आलम की ओर से भी कोताही नहीं बढ़ती जा रही है। जन अधिकार पार्टी के उम्मीदवार गैसुल आजम। पप्पू भी चुनाव प्रचार ने पूरी ताकत झोंक रखा है। निर्दलीय प्रत्याशी और स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन के ममेरे भाई शब्बीर अहमद भी मैदान-ए-जंग में भरपूर ताकत लगा रखा है। उम्मीदवार जनसंपर्क में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन मतदाता खामोश हैं।
गांव-गलियों में चल रहा संपर्क अभियान
रात में चुनाव प्रचार का जोर कुछ ज्यादा ही नजर आने लगा है। एनडीए प्रत्याशी की ओर से सुबह के एक मंत्री बीते कई दिनों से जिला मुख्यालय के एक होटल में रात गुजारते तो हैं लेकिन दिनभर जोकीहाट के गांव की गलियों में लोगों से संपर्क करते हुए एडीए प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का आग्रह कर रहे हैं। हालांकि मीडियाकर्मियों से अब तक परहेज करते ही नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा के कई पूर्व विधायक जोकीहाट के गांव-गांव में मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए हैं। इधर, जाप के संरक्षक सांसद पप्पू यादव भी अपने प्रत्याशी के पक्ष में कई चुनाव सभा को संबोधित कर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे हैं दूसरी ओर नरपतगंज के राजद विधायक अनिल कुमार यादव राजद जिला अध्यक्ष कमरुज्जमा सहित राजद के दर्जनों क्षेत्रीय नेता गांव गांव जनसंपर्क कर राजद प्रत्याशी को वोट देने का अनुरोध करते नजर आने लगे हैं।
6 निर्दलीय प्रत्याशी आजमा रहे अपना भाग्य
अररिया के राजद सांसद सरफराज आलम भी अपने स्तर से राजद प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का अनुरोध मतदाताओं से कर रहे हैं। सियासत के इस जंग में कौन जीतेगा और कौन हारेगा। यह तो मतदान के बाद होने वाले मतगणना से ही सामने आएगा। लेकिन तस्लीमुद्दीन के बनाएं दुर्ग को भेदने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जा रहा है। चुनावी जंग में तीन दलीय प्रत्याशियों के अलावा 6 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। सबसे अहम ये मतदाता अब तक खामोश हैं। कुरेदने पर भी पर भी अपनी जुबान नहीं खोलते। लेकिन यह कहना भी नहीं छोड़ते कि मन बना लिया है। किसे वोट देना है। किसी नेता के आने-जाने भाषण देने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गिनती के बाद पता चल जाएगा। जोकीहाट की जनता ने क्या फैसला दिया है। बाहर हाल महज 7 दिन बचे हैं। मतदान के बावजूद लोगों की खामोशी अब भी कायम है।