दरज भी है, अरज भी है, गरज भी है। अमर कथाशिल्पी रेणु की कविता का यह अंश सटीक लगता है। जोकीहाट के उपचुनाव में। मुद्दा विहीन हो गया है चुनाव। लेकिन लोगों में दर्द है कि सीमांचल गांधी मरहूम तस्लीमुद्दीन के सपनों को पूरा करने की बातें कोई नहीं कर रहा। अगर कर भी रहा है तो लोग भरोसा नहीं कर रहे। उदाहाट को प्रखंड का दर्जा कब मिलेगा। जोकीहाट के दक्षिणी हिस्से के लोग यह सवाल उठाते नजर आते हैं। वही सेंट्रल जोकीहाट में लोग दबी जुबान से ही सही यह सवाल उठाते हैं की जोकीहाट को अनुमंडल का दर्जा कब मिलेगा। इस पर कोई नहीं बोल रहा है। नाम नहीं छापने के शर्त पर दलीय कार्यकर्ता ने बताया कि प्रचार-प्रसार के दौरान इन सवालों से रूबरू होना पड़ रहा है। गरज भी है कि बरसात के दिनों में जिला मुख्यालय या फिर प्रखंड मुख्यालय जाने आने में परेशानी होती है। आखिर अजगरा घाट पुल हो या दो मोहना घाट पुल हो। इन पुलों का निर्माण कब होगा इन बातों पर कोई प्रत्याशी सार्थक चर्चा नहीं कर रहा है। बताना लाजमी होगा इन पुलों के निर्माण के लिए सीमांचल गांधी ने वर्तमान सांसद सरफराज आलम की उपस्थिति में शिलान्यास किया था। बरसों से यह पुल अधूरा है। क्षेत्रीय लोगों का गुस्सा भले ही शब्द बनकर जुबां पर ना आती हो, लेकिन बोलने से चूकते भी नहीं हैं। मतदाताओं का अरज भी है कि इन पुलों का कब होगा निर्माण कार्य पूरा। क्षेत्रीय लोग सवाल उठाते आधारभूत संरचनाओं को देखकर लोग कब तक उम्मीद लिए जीते रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन तो है लेकिन ना तो नर्स है और ना ही कभी चिकित्सक आते है। क्या औचित्य रह जाता है इन भवनों का। बाढ़ से निजात दिलाने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे।
चंडीपुर गांव में अब तक बिजली नहीं
पलासी प्रखंड के चंडीपुर गांव में अब तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंची रही है। यह जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह दरद है। चंडीपुर गांव के मतदाता व पूर्व मुखिया विजय झा कहते हैं कि इन मुद्दों पर ना तो दलीय प्रत्याशी कोई भरोसा दिला रहे है और ना ही स्वतंत्र प्रत्याशी। क्षेत्र में बाढ़ से तबाही मचाने के निशान आज भी मौजूद है। ग्रामीण सड़कें इसकी गवाही दे रही है। इन मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है।
नजर सिर्फ और सिर्फ सांसद पर
जोकीहाट में कई तरह के चर्चाएं हो रही है। सियासत करने वालों की नजर सिर्फ और सिर्फ सांसद पर है कि वह क्या निर्णय लेते हैं। उनके निर्णय से ही मतदाताओं में एक पैगाम जाएगा और चुनावी जंग दिलचस्प होगा। इधर, जदयू प्रत्याशी के लिए पूर्व सांसद प्रदीप कुमार सिंह, भाजपा नेता रंजीत यादव भी परोक्ष और अपरोक्ष रूप से काम कर रहे हैं। जनता को मैसेज दे रहे हैं। मतदाताओं को रिझाने का प्रयास सभी प्रत्याशी कर रहे हैं।