जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव के मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। जोकीहाट की सीट पर एक ही परिवार की बादशाहत बरकरार रहेगी या फिर कोई दूसरा उम्मीदवार जीतेगा। इसका फैसला तो 28 मई को होना है। लेकिन वहां की राजनीति की बिसात पर शह और मात का खेल चल रहा है। इस विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाइटेड, जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशियों समेत कुल 9 उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं। मोहम्मद इरफान आलम और शब्बीर अहमद के मैदान में रहने से चुनावी गणित में उलट-पुलट होता दिख रहा है। लेकिन इनके मैदान में रहने से किन्हें घाटा और कितने फायदा हो रहा है, यह तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। जोकीहाट की पहचान तस्लीमुद्दीन से जानी जाती है और तस्लीमुद्दीन की पहचान भी जोकीहाट से शुरू हुई थी। तस्लीमुद्दीन के बाद सरफराज आलम ने जोकीहाट का प्रतिनिधित्व किया। अब जोकीहाट के प्रतिनिधित्व के लिए स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र उप चुनाव में उम्मीदवारी दे चुके हैं। जबकि सिकटी विधानसभा से 10 साल पूर्व चुनाव लड़ चुके पूर्व मुखिया मुर्शीद आलम इस बार बिहार के सत्ताधारी दल जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं जन अधिकार पार्टी की टिकट पर जिला परिषद सदस्य गौसुल आजम चुनावी मैदान में डटकर मुकाबला कर रहे हैं।
12 उम्मीदवारों ने भरा था नामांकन अब सिर्फ 9
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चुनावी दौरों ने पकड़ा जोर
मई को होना है जोकीहाट उपचुनाव का मतदान
मतदान में अभी 8 दिन बाकी है। बताया जाता है कि दोनों गठबंधन की तरफ से नेताओं का दौरा लगातार जोकीहाट और पलासी के विभिन्न इलाकों में चल रहा है। जदयू सूत्रों की मानें तो अपने उम्मीदवार की प्रचार के लिए बिहार के मुख्यमंत्री भी चुनाव प्रचार के लिए पहुंच सकते हैं।
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उम्मीदवार उपचुनाव मैदान में आजमा रहे अपना भाग्य